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पुखरायां रेल हादसे की छानबीन करने पहुंचे एनआईए आईजी

Sun, 29 Jan 2017 02:06 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

-सवा तीन घंटे लेट पहुंची शताब्दी से आए आलोक मित्तल
-सुबह एनआईए की एक टीम ने पुखरायां में की सुरागरशी, मोहल्लों में घूमी
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कानपुर में पुखरायां रेल हादसे की जांच करने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के आईजी आलोक कुमार मित्तल शनिवार को कानपुर पहुंचे। सुबह सवा 11 बजे आने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन सवा तीन घंटे लेट दोपहर साढ़े तीन बजे कानपुर सेंट्रल पहुंची। आईजी सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर सात पर उतरे लेकिन किसी से बातचीत नहीं की और पुखरायां चले गए।
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पुखरायां में 20 नवंबर को तड़के करीब पौने पांच बजे इंदौर-पटना एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी। हादसे में 152 यात्रियों की मौत हुई थी और 300 से अधिक यात्री घायल हुए थे। इस हादसे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की पुष्टि हुई है। इस पर एनआईए की एक टीम सुबह पुखरायां पहुंची और मामले की जांच में जुट गई। पुखरायां के दलेलनगर सहित कई मोहल्लो में टीम चुपचाप घूमती रही। बाद में आईजी भी हादसे वाली जगह पर पहुंचे और अपनी टीम के साथ छानबीन की। सेंट्रल पर डिप्टी सीटीएम जितेंद्र कुमार, जीआरपी इंस्पेक्टर सतीश गौतम, झांसी जीआरपी इंस्पेक्टर एके यादव और आरपीएफ इंस्पेक्टर समेत सीआईटी कानपुर दिवाकर तिवारी और सीआईटी झांसी डी टोप्पो ने आईजी को रिसीव किया।

साइबर एक्सपर्ट हैं आलोक मित्तल
एनआईए के आईजी आलोक मित्तल साइबर एक्सपर्ट हैं। उन्होेंने हैदराबाद की नलसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से साइबर लॉ में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, उस्मानिया यूनिवर्सिटी से पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की है। हरियाणा कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अफसर आलोक मित्तल सीबीआई की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग और साइबर क्राइम सेल के एसपी 2001 से 2005 तक रहे हैं। वे पानीपत, फरीदाबाद, रोहतक और पंचकुला के पुलिस कप्तान रह चुके हैं। रोहतक के आईजी और गुड़गांव के पुलिस कमिश्नर बनने के बाद अब वे एनआईए के आईजी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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मैकेनिकल इंजीनियर भी हैं मित्तल
इलाहाबाद में जन्मे आलोक मित्तल मैकेनिकल इंजीनियर भी हैं। शायद इसीलिए गृह मंत्रालय ने उन्हें रेल हादसे की जांच के लिए नियुक्त किया है। उन्होंने आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की है। पटरियों और बोगियों को आतंकी हमले से किस तरह शिकार बनाया गया, इसकी जांच में उन्हें आसानी होगी।
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