यूपी के हमीरपुर जिले में हो रहे मौरंग खनन में पर्यावरण समेत अन्य मानकों की अनदेखी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शिकंजा कस दिया है। एनजीटी ने जिले में 22 पट्टाधारकों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है।
एनजीटी के जस्टिस डॉक्टर नारेन नंदा की पीठ ने अमित उपाध्याय की याचिका पर 17 दिसंबर को यह आदेश पारित किया। उपाध्याय ने 14 नवंबर 2018 को एनजीटी में याचिका दाखिल कर हमीरपुर की मौरंग खदानों में ट्रिब्यूनल के तय मानकों की अनदेखी समेत पर्यावरण को हो रहे नुकसान की बात कही थी। एनजीटी कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि मौरंग ठेकेदार पर्यावरणीय मानकों को ताक पर रखकर खनन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को क्षति हो रही है।
इसके अलावा एनजीटी के दिशा निर्देशों को किनारे कर इन्वायरमेंट इंडियन एजेंसी (ईआईए) ने पर्यावरण मंजूरी दी, जो फर्जी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी कोर्ट ने खदानों के पट्टाधारकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उधर, खनिज अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि एनजीटी कोर्ट से नोटिस मिली है। पट्टाधारकों ने प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया है।
इनसे मांगी रिपोर्ट
खंड संख्या 26/3 (गहुली-सरीला), खंड संख्या 23/19 (भेड़ी खरका-सरीला), खंड संख्या 24/9 (चिकासी-सरीला), खंड संख्या 24/14 (चिकासी-सरीला), खंड संख्या 23/12 (भेड़ी खरका-सरीला), बेरी-हमीरपुर सदर, खंड संख्या 10/4 (बेरी-हमीरपुर), खंड संख्या 19/4 (टीकापुर-मौदहा), खंड संख्या 19/5 (टीकापुर-मौदहा), खंड संख्या 18/1 (सहुरापुर-हमीरपुर), खंड संख्या 23/7 (भेड़ी खरका), खंड संख्या 23/13 (भेड़ी खरका), खंड संख्या 23/20 (भेड़ी खरका), खंड संख्या 11/4 (रमेड़ी सदर), खंड संख्या 26/7 (चंदवारी-सरीला), खंड संख्या 10/36 (बेरी), खंड संख्या 9/3 (कंडौर), खंड संख्या 17/5 (सहजना), खंड संख्या 30/1, (भुलसी), खंड संख्या 30/2 (भुलसी), खंड संख्या 31/5 (पत्योरा), खंड संख्या 30/3 (भुलसी) हैं।