अगर आप मछली खाने का शौक रखते हैं तो सावधान हो जाइए। नदियों में बढ़ते प्रदूषण के चलते मछलियां ट्यूमर, पैरासीड्स जैसी बीमारियों का तेजी से शिकार हो रही हैं। इन मछलियों को खाने वाले लोगों में भी कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियां फैल रही हैं।
यह जानकारी कानपुर में शनिवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई) के निदेशक डॉ. कैलाश चंद्रा ने दी।
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इनवायरमेंट, हेल्थ एंड बायोसाइंसेज विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार पहुंचे डॉ. कैलाश ने बताया कि पिछले दो दशक में गंगा, यमुना सहित देश की सभी नदियां काफी प्रदूषित हुई हैं। इसका असर है कि काफी जीव-जंतु विलुप्त हो चुके हैं। तमाम विलुप्त होने के पहले स्टेज पर हैं। इसमें बतख, मेंढक, कछुआ, व्हाइट बेलिड हेरॉन पक्षी आदि शामिल हैं। डॉ. कैलाश चंद्रा ने बताया कि गंगा में पहले 300 प्रजातियों के जलीय जीव-जंतु हुआ करते थे, अब केवल 200 प्रजातियां बची हैं।
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उन्होंने बताया कि भारत में 1,01,167 प्राणियों की प्रजातियां हैं। इनमें सबसे ज्यादा कीट की 65,222 प्रजातियां हैं। इसके अलावा प्लांट (पौधों) की कुल 49 हजार छह प्रजातियां भारत में हैं। डॉ. चंद्रा के मुताबिक समुद्री इलाकों में 22 हजार 444 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें भी काफी प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही हैं।
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फसलों को बर्बाद कर देता विदेशी घोंघा
डॉ. कैलाश चंद्रा ने बताया कि लोग स्टेटस सिंबल या व्यापार बढ़ाने के लिए मछली, पक्षी या तरह-तरह के कई अन्य जीव-जंतु विदेशों से भारत लाते हैं। ये विदेशी प्रजातियां भारतीय प्रजातियों के लिए खतरा बनती जा रही हैं। डॉ. चंद्रा ने बताया कि जेंट अफ्रीकन स्नेल (घोंघा) को ब्रिटिश व जापानी लोग भारत लेकर आए और इसके वजह से भारतीय घोंगा विलुप्त हो गए। ये अफ्रीकन घोंघा अब पूरे देश में पाया जाता है। इसकी प्रजाति इतनी खराब है कि यह सीधे खेतों में फसलों को निशाना बनाता है और उसे पूरी तरह से बर्बाद कर देता है।
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प्लास्टिक के खात्मे को तैयार कर रहे प्रजातियां
डॉ. कैलाश चंद्रा ने बताया कि जेडएसआई के विशेषज्ञ जीव-जंतु की ऐसी प्रजातियां तैयार करने के लिए शोध कर रहे हैं जो प्लास्टिक को खत्म कर सके। इसके लिए काफी तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि पौधों में भी ऐसी मेडिसिनल प्रजातियां तैयार की जा रही हैं जो प्रदूषण के स्तर को न के बराबर करने में सहायक हों और लोगों को ज्यादा से ज्यादा स्वच्छ हवा दें। इसके लिए जेएडएसआई और सीडीआरआई के विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे।
एक नजर इस पर भी
- 683 प्रजातियां जीव-जंतुओं की विलुप्त होने के कगार पर हैं।
- 78 प्रजातियां ऐसी जो लगभग खत्म हो चुकी हैं
- 209 एक-दो साल में विलुप्त हो जाएंगी
- 396 जीव-जंतुओं की प्रजातियां विलुप्त होने के पहले स्टेज पर
- नदियों में बढ़ते प्रदूषण से मछलियों में बढ़ रहीं बीमारियां
- कहा, प्रदूषण के चलते तेजी से घट रहीं जीव-जंतुओं की प्रजातियां