पढ़ाई में कमजोर और बार-बार परीक्षाओं में फेल हो रहे आईआईटी के परास्नातक और पीएचडी के नौ छात्रों को आखिरकार संस्थान ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। वहीं, 54 छात्रों को राहत देते हुए एक और मौका देने का फैसला लिया है। मंगलवार को हुई इमरजेंसी सीनेट में यह फैसला हुआ।
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इसके पहले 17 दिसंबर को सीनेट ने स्नातक, परास्नातक और पीएचडी के कुल 136 छात्रों को अस्थायी तौर पर टर्मिनेट किया था। इसके बाद छात्रों ने अपील दायर करने के साथ बताया था कि उन्हें किसलिए वापस संस्थान में पढ़ाई करने का मौका दिया जाए। मंगलवार को केवल परास्नातक और पीएचडी छात्रों की अपील पर ही सुनवाई हो सकी। इसमें कुल 63 छात्रों का मामला रखा गया।
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अलग-अलग सभी की अपीलों पर घंटों चर्चा हुई और आखिरकार 54 छात्रों को राहत देते हुए उनका टर्मिनेशन वापस ले लिया गया जबकि नौ छात्रों को संस्थान से निष्कासित कर दिया गया। इसके अलावा स्नातक के करीब 46 छात्रों के मामले की सुनवाई अब छह या सात जनवरी को आयोजित होने वाली सीनेट की स्पेशल बैठक में होगी।
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गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश पर भी हुई चर्चा
सीनेट में गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले पर भी चर्चा हुई जिसमें आईआईटी गुवाहाटी से टर्मिनेट किए गए छात्रों को वापस मौका देने के लिए कहा गया था। हालांकि ज्यादातर सीनेट सदस्यों ने साफ कर दिया कि कमजोर छात्रों पर अधिक फोकस तो किया जा रहा है लेकिन किसी भी तरह से गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता है।
बहाल छात्रों पर होगा अधिक फोकस
सीनेट ने यह भी तय किया है कि बहाल किए गए छात्रों पर प्रोफेसर अधिक मेहनत करेंगे। छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं भी चलाई जाएंगी। छात्र जिस विषय में अधिक कमजोर हैं, उसे पढ़ाने के लिए प्रोफेसर भी अधिक समय देंगे।