कोरोना महामारी के ठीक पहले व्यापार शुरू करने वाले उन लोगों पर दोहरी मार पड़ी, जो लॉकडाउन की बंदी नहीं झेल पाए और व्यापार बंद करना पड़ा। ऐसे व्यापारियों पर महामारी के साथ-साथ केस्को ने भी सितम ढाया।
व्यापार बंद करने के बाद जब कनेक्शन को सरेंडर करने के लिए परमानेंट डिस्कनेक्शन कराना चाहा तो केस्को ने उनसे छह महीने का एडवांस औसत बिल ले लिया। वह भी बिना बिजली इस्तेमाल किए। कहा गया कि यह विद्युत नियामक आयोग की गाइडलाइन के तहत है।
केस-1
जाजमऊ के लालबंगला बाजार में अंकित जायसवाल ने अक्तूबर 2019 में रेडीमेड गारमेंट्स की दुकान खोली थी। छह महीने बमुश्किल दुकान चलाई थी कि लॉकडाउन लग गया। इसके बाद सप्ताहिक बंदी और तमाम बंदिशों के बाद व्यापार प्रभावित हुआ तो दुकान बंद कर दी। बिजली का पूरा बिल जमा करने के बाद जब परमानेंट डिस्कनेक्शन (पीडी) के लिए पहुंचे तो पिछले महीने के बिल के हिसाब से एडवांस छह महीने का औसत बिल जमा करने का प्रावधान बताया गया। यह जमा करने के बाद ही पीडी किया गया।
केस-2
काकादेव में शिवम मिश्रा ने भी एक कॉफी रेस्टोरेंट खोला था। करीब एक साल चलाने के बाद जब कॉमर्शियल कनेक्शन को सरेंडर करना चाहा तो उनके सामने भी छह महीने का एडवांस बिजली का बिल जमा करने की परेशानी आई। उन्होंने कहा कि पहले ही व्यापार में नुकसान उठाया है और अब बिना बिजली इस्तेमाल के छह महीने का बिल क्यों जमा करें, तो कहा गया कि यह प्रावधान है।
कामर्शियल और औद्योगिक कनेक्शन लेते समय राज्य विद्युत नियामक आयोग की गाइडलाइन के तहत कम से कम दो साल तक कनेक्शन को चलाने का एग्रीमेंट होता है। किसी वजह से पहले पीडी कराने पर छह महीने का औसत बिजली का बिल जमा करना होता है। - चंद्रशेखर अंबेडकर, मीडिया प्रभारी, केस्को