साइबर ठगी और क्लोनिंग के जरिये खातों से जनता की कमाई उड़ाने वालों ने पुलिस, बैंक और सरकार की नींद उड़ा रखी है। जालसाजों के आगे डिजिटल इंडिया की सभी तरकीबें फेल होती दिख रही हैं। कानपुर में बीते दो दिनों में चेक क्लोनिंग के दर्जन भर मामले सामने आ चुके हैं। यानी बैंकों में जमा धन सुरक्षित नहीं है। चेक, एटीएम, थंब इंप्रेशन व वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) जैसी व्यवस्थाएं कारगर साबित नहीं हो पा रहीं।
बैंकिंग से जुड़े जानकार बताते हैं कि ठगी किसी भी प्रकार की हो, अधिकतर मामलोें में बैंक से जुड़े लोगों की मदद के बगैर यह संभव नहीं हो पाता। बैंकों में तैनात किए गए बैंक मित्र बैंकिंग व्यवस्था को खोखला करने के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
एक बैंक अफसर का कहना है कि बैंक मित्र ग्राहक से जुड़े सभी दस्तावेजों तक पहुंच रखते हैं। वे बैंकिंग व्यवस्था के अंग नहीं होते, उन्हें वेतन भी पर्याप्त नहीं मिलता, इस वजह से उनके ईमान को हिलाना आसान होता है। वे जरा से लालच में सूचनाओं का आदान प्रदान आसानी से कर देते हैं। अधिकतर मामलों में बैंक मित्रों की और कभी कभी बैंक कर्मियों की मिलीभगत सामने आती है।
डेमो पिक
चेक क्लोनिंग सबसे आसान
बैंकिंग मामलों के जानकार राजेंद्र अवस्थी बताते हैं कि बैंकिंग फ्रॉड में चेक की क्लोनिंग सबसे आसान है। किसी भी व्यक्ति की चेकबुक देखकर उसी तरह का नकली चेक तैयार किया जाता है। जालसाज नकली चेक बनाने के लिए बैंक के ही किसी व्यक्ति की मदद से चेकबुक व अन्य सूचनाएं हासिल करते हैं। ऐसे शख्स की चेक क्लोन की जाती है जो अधिक पढ़ा लिखा न हो, मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट न लगा हो, लेकिन खाते में पर्याप्त रकम हो।
सिम क्लोनिंग के मामले बढ़े
मोबाइल कंपनी में काम करने वालों से आधार कार्ड की डिटेल निकलवाकर सिम क्लोनिंग की जा रही है। अंगूठे का रबर स्टैंप तैयार कर नया सिम एक्टिवेट कर लिया जाता है। क्लोन सिम के जरिये ओटीपी हासिल किया जाता है अथवा रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। कानपुर में ही एक साल के भीतर एक हजार से अधिक लोगों को सिम क्लोनिंग की वजह से करोड़ों रुपये की चपत लगी। इनमें से 86 मामलों में एफआईआर दर्ज हैं। 13 का पुलिस ने खुलासा भी किया है।
डेमो पिक
डेबिट कार्ड भी हो रहे क्लोन
हद तो ये है कि एटीएम से रकम निकालना भी सुरक्षित नहीं है। एटीएम बूथ में स्किमर डिवाइस लगाकर जालसाज डेबिट क्रेडिट कार्ड की भी क्लोनिंग कर रहे हैं। हालांकि यह सब संभव तभी होता है जब बैंक के किसी व्यक्ति की मिलीभगत होती है। बीते दिनों स्किमर के जरिये डेबिट कार्ड क्लोन किए जाने के मामले सामने आए हैं।
तीन से चार गुना बढ़ा ग्राफ
देश में नोटबंदी के बाद साइबर अपराध का ग्राफ तीन से चार गुना बढ़ा है। शहर में साइबर क्राइम का एक-दो मुकदमा हर दिन दर्ज होता है। इन मुकदमों की जांच के लिए पुलिस के पास न तो दक्ष स्टाफ है और न ही तकनीक। जांच अधिकारियों के पास 15 से 20 मुकदमे लंबित हैं। इन सबके बीच विवेचक पर मामले को निस्तारित करने का भी दबाव रहता है। दबाव बढ़ने पर विवेचक फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमे को ही बंद कर देते हैं। इस तरह से ठगी का खुलासा नहीं हो पाता।
डेमो पिक
ठगी से बचने के उपाय
ग्राहक एसएमएस अलर्ट जरूर कराएं। पिनकोड व पासवर्ड की जानकारी गुप्त रखें। चेकबुक हर किसी को न दिखाएं। मोबाइल में बैंक खाता संख्या व पासवर्ड न रखें। बैंक संबंधी गुप्त जानकारी मोबाइल व कंप्यूटर में न रखें। संबंधित बैंक के शाखा व मुख्य लिपिक का फोन नंबर जरूर रखें। लाटरी व इनाम के फोन पर पहले असलियत परखें।
ठगी होने पर क्या करें
आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते है तो सबसे पहले आप हेल्पलाइन में फोन कर कार्ड को ब्लाक करवा दें। बैंक जाकर खाते में ट्रांजेक्शन बंद करवा दें। इसके बाद पुलिस की साइबर सेल में जाकर शिकायत दर्ज कराएं।