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अब आय छिपाना पड़ सकता है भारी, कालेधन पर नजर रखने के लिए सरकार ने अपनाए ये 10 तरीके

Mon, 22 Oct 2018 07:40 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- 10 के दम पर कालेधन पर नजर 
- सरकार को खुद ब खुद हो रही है जानकारी 
- रिटर्न में आय छिपाना पड़ सकता है भारी 
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विस्तार
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10 लाख रुपये का निवेश और 10 नियम। ये दो बातें कालेधन पर नजर रखने के लिए सरकार की आंख, नाक और कान का काम कर रही हैं। इस 10 के दम पर सरकार हर छोटे और बड़े व्यक्ति की वित्तीय स्थिति को खंगाल रही है। नोटबंदी के बाद बने 10 नए नियम आयकर विभाग के लिए बड़े मददगार साबित हुए हैं।
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आयकर विभाग के अधिकारी ऐसे 10 तरह के लेनदेन के बारे में बताते हैं जिनकी सूचना सरकार तक खुद ब खुद पहुंच जाती है। ये सूचनाएं दरअसल वित्त मंत्रालय के फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट को जाती हैं। यहां से आयकर विभाग को टारगेट देकर आगे की कार्रवाई के लिए सक्रिय किया जाता है। आप भी जानिए वे 10 व्यवस्थाएं। 

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10 लाख रुपये नकद जमा 
यदि आप एक साल में एक या एक से अधिक खातों में 10 लाख रुपये या इससे अधिक जमा करते हैं तो बैंक के सॉफ्टवेयर यह सूचना सरकार तक खुद ब खुद पहुंचा देते हैं। इस पर आयकर विभाग आपसे आय का स्रोत पूछ सकता है। 

10 लाख रुपये की एफडी
एक साल में 10 लाख रुपये या इससे अधिक की एफडी भी हुई है तो भी सूचना आयकर विभाग तक अपने आप पहुंच जाएगी। यदि रिटर्न में यह सूचना सही नहीं भरी गई तो लेने के देने पड़ सकते हैं। 

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10 लाख की विदेशी मुद्रा पर
यदि कोई 10 लाख रुपये या इससे अधिक की विदेशी मुद्रा खरीदता है तो विदेश मुद्रा बेचने वाले को इसकी जानकारी आयकर विभाग को स्वत: देनी होगी। नहीं देने पर लेने और देने वाले दोनों फंसेंगे। 

10 लाख के बॉन्ड खरीद पर 
एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये या इससे अधिक का बॉन्ड या डिबेंचर खरीदने वाले की चुगली कंपनियां खुद कर रही हैं। आयकर के नियमों के मुताबिक डिबेंचर बेचने वाली कंपनियां इसकी सूचना विभाग को गोपनीय तौर पर देंगी। 

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10 लाख के म्यूचुअल फंड पर
एक साल में 10 लाख रुपये या इससे अधिक का म्यूचुअल फंड खरीदने वाली की जानकारी फंड हाउस खुद ब खुद सरकार को देते हैं। इस आधार पर आयकर विभाग आय का स्रोत पूछता है। 

क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान
यदि कोई अपने क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये या इससे अधिक का भुगतान करता है अथवा एक साल में 10 लाख रुपये तक के क्रेडिट कार्ड का बकाया भुगतान करने के लिए चेक या ऑनलाइन विधि का इस्तेमाल करता है। 
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नोटबंदी के दौरान जमा से छुटकारा नहीं 
- यदि किसी व्यक्ति ने नोटबंदी के दौरान ढाई लाख रुपये या इससे अधिक जमा किए हैं तो उसे अभी भी जांच से छुटकारा नहीं मिलेगा। इसकी जांच कभी भी हो सकती है। जमा करने वाले को इसका हिसाब देना होगा। 
- इसी तरह नोटबंदी के बाद करंट एकाउंट में 12.50 लाख रुपये से अधिक जमा करने वाले भी आयकर विभाग की नजर में हैं। इन्हें नोटिसें भेजी जा रही हैं। 
- एक अप्रैल से नौ नवंबर 2016 के बीच जमा किया गया धन भी आपकी कमाई की चुगली कर रहा है। सरकार इस दौरान जमा हुई रकम से आपकी कमाई का औसत निकाल रही है। 
- इसी तरह यदि कोई व्यक्ति 30 लाख रुपये या इससे अधिक का घर या जमीन खरीदता है तो सब रजिस्ट्रार कार्यालय इसकी सूचना सरकार तक पहुंचाते हैं। 
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