कानपुर। अनियंत्रित हृदय गति को सर्जरी कर स्थायी तौर पर नियंत्रित करने का नया और प्रभावी तरीका कॉर्डियोलॉजी में निकाला गया है। निदेशक डॉ. राकेश कुमार वर्मा का दावा है कि कॉक्स मेज फोर ऑपरेशन की तकनीक से हृदय गति को नियंत्रित करने वाला यूपी में पहला संस्थान कानपुर कॉर्डियोलॉजी बना है। अस्पताल में यह समस्या लेकर ओपीडी और इमरजेंसी में रोजाना 20 से 25 रोगी आ रहे हैं। शोध के रूप में 15 रोगियों की सर्जरी सफल रहने पर अब इसे अन्य रोगियों के लिए भी प्रयोग में लाया जा रहा है।
हृदय की गति अनियंत्रित होने का कारण आनुवंशिक होता है। अस्पताल आने वाले इन रोगियों की हृदय गति 150 से 200 तक होती है जबकि सामान्य हृदय गति 70 से 80 के बीच रहती है। हृदय गति बढ़ने से रोगी को तेज पसीना, सीने में दर्द, हृदय गति इंजन जैसे चलता महसूस होता है, सांस फूलने के साथ ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में अधिकतर रोगियों का उपचार दवाओं से किया जाता है। करीब 30 से 40 फीसदी लोगों में कुछ समय के बाद दवाओं का असर होना खत्म हो जाता है और फिर से स्थिति पहले जैसी हो जाती है। इसके बाद इलेक्ट्रो फिजियोलॉजिकल विधि से गति कम करने के लिए कैथलैब में इलाज होता है। इस विधि में हृदय में गति बढ़ाने वाले एक्स्ट्रा फाइबर को बाहर से जलाया जाता है। इस दौरान सभी फाइबर नहीं जल पाते और कुछ समय बाद फिर से हृदय गति बढ़ने लगती है। ये विधि भी करीब 50 फीसदी ही प्रभावी होती है।
डॉ. राकेश ने बताया कि इन दोनों तरीकों के पूरी तरह प्रभावी न होने पर नई तकनीक से सर्जरी के लिए करीब एक करोड़ 30 लाख की कीमत से दो नई मशीनें संस्थान में मंगाई गईं। इनसे पहले 15 रोगियों पर सर्जरी की गई और पाया कि सभी के परिणाम शत-प्रतिशत हैं। अब अनियंत्रित गति वाले सभी हृदय रोगियों की सर्जरी निशुल्क की जाती है।
नई तकनीक से सर्जरी बहुत ही बारीकी से की जाती है। इसमें हृदय की गति बढ़ाने वाले एक्स्ट्रा फाइबर को आंखों से देखकर मशीनों से जलाया जाता है। इससे हृदय की गति सामान्य रूप से चलने लगती है और किसी तरह की कोई क्षति भी नहीं पहुंचती है। लगातार बढ़ी हुई हृदय गति से कंपलीट हार्ट ब्लॉक का खतरा होता है। ये सर्जरी उन रोगियों के भी हो जाती है जिनके हृदय का वाल्व खराब होता है या हृदय में थक्का बन जाता है। ऐसे में वाल्व रिप्लेसमेंट के साथ हृदय गति को नियंत्रित करने के लिए भी सर्जरी की जा सकती है।