सीएम ग्रिड योजना के तहत कानपुर और लखनऊ में सड़कें बननी हैं। स्थानीय नगर निगम ने पांच सड़कें नई तकनीक से बनाने के लिए डीपीआर चार महीने पहले तैयार की थी। निर्माण की अनुमानित लागत 192 करोड़ रुपये है। ये सड़कें यूरिडा की देखरेख में बनेंगी।
मुख्य अभियंताओं के साथ योजना की समीक्षा की
शासन से स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर भी जारी कर दिए गए थे, पर उसके दो दिन बाद ही आचार संहिता लागू हो गई थी, जिसकी वजह से टेंडर नहीं खुल पाए थे। बाद में शासन ने टेंडर निरस्त कर दिए थे। अब नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों नगर निगमों के मुख्य अभियंताओं के साथ योजना की समीक्षा की।
सड़कों में सीवर लाइनें और पाइपलाइनें नहीं होनी चाहिए
प्रमुख सचिव ने कानपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी से कहा कि इस योजना के तहत जो सड़कें बननी हैं, उनमें सीवर लाइनें और पाइपलाइनें नहीं होनी चाहिए। कभी लाइन में लीकेज हुआ या सड़क धंसेगी और खोदाई कराकर मरम्मत कराना पड़ेगी।
संशोधित डीपीआर तैयार की जाएगी
बंगलुरू में डेढ़ महीने पहले नगर निगम के अधिकारियों ने निरीक्षण किया था, वहां सीवर लाइनें और पाइपलाइनें सड़क के किनारे डाली गई हैं। वही तरीका यहां भी अपनाया जाए। प्रमुख सचिव ने यह भी कहा कि इस योजना के तहत चिह्नित जिन सड़कों में पाइपलाइनें, सीवर लाइनें नहीं हैं, वहां भी सड़कों के किनारे इनका प्रावधान करते हुए संशोधित डीपीआर तैयार की जाए।
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने सीएम ग्रिड योजना के तहत सड़कों के निर्माण के लिए संशोधित डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 10 जून तक यूरिडा को डीपीआर भेजनी है। आचार संहिता खत्म होने के बाद नगर निगम करीब 200 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराएगा, इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। -मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता, नगर निगम