इतने में होता था सौदा
एसआईटी के मुताबिक एक केस में सुनीता और मिथुन ढाई-ढाई लाख रुपये लेते थे। तीन से पांच लाख रुपये टी राजकुमार या गौरव को दिए जाते थे, जिसमें से कुछ हिस्सा डोनरों को मिलता था।
रिश्तेदार लेने जाता था रकम
किडनी कांड के एक पीड़ित और गवाह ने अपने बयानों में बताया कि कोऑर्डिनेटर सीधे रकम नहीं लेते थे। उनके बहुत ही करीबी रिश्तेदार हॉस्पिटल के बाहर सौदेबाजी की रकम लेते थे। रकम रिसीवर उन तक पहुंचाते थे।
गवाह से पुलिस ने किया संपर्क
कोऑर्डिनेटरों से पूछताछ के दौरान एसआईटी ने शनिवार को गवाहों और पीड़ितों से संपर्क किया था। फोन पर ही उनसे जानकारी ली कि वह कोऑर्डिनेटर से कहां मिले। क्या बातचीत हुई और वह किस तरह से किडनी की सौदेबाजी की।