प्रदूषण के असर से खून गाढ़ा हो रहा है जिसका असर नसों पर पड़ रहा है। इससे नसों के वाल्व खराब हो रहे हैं। अगर किसी को घंटों लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करना पड़ता है तो वह एहतियात बरते और थोड़ी-थोड़ी देर में चल-फिर ले, नहीं तो वेरीकोज वेन रोग की गिरफ्त में आ जाएगा। वेरीकोज वेन का अगर शुरुआत में इलाज हो जाए तो मर्ज ठीक हो जाता है। वेरीकोज वेन के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में दो साल में पांच सौ वेरीकोज वेन की लेजर सर्जरी की गई। रोगी की नसों में खून का थक्का जमने से हार्ट अटैक का खतरा रहता है। वेरीकोज वेन के रोगियों की संख्या बढ़ने और इलाज के संबंध में पांच सौ रोगियों पर इंस्टीट्यूट के सीनियर सर्जन डॉ. नीरज कुमार की रिसर्च रिपोर्ट जुलाई में दिल्ली में हुई एशिया-पैसिफिक वैस्कुलर कॉन्फ्रेंस में भी प्रस्तुत की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण के अलावा खानपान में गड़बड़ी से मोटापा, हाई ब्लड शुगर, कोलेस्ट्राल और हाई ब्लड प्रेशर रोग बढ़ रहा है। वेरीकोज वेन होने से नसों में खून का संचार बाधित होता है जिससे पैरों में अल्सर हो जाते हैं। नसों का गुच्छा बन जाता है। नसें मोटी हो जाती हैं। घंटों बैठकर या एक ही स्थान पर खड़े रहने वाले इसकी अधिक चपेट में आते हैं।