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प्रदूषण के असर से गाढ़ा हो रहा खून, खराब हो रहे वाल्व

Sat, 14 Sep 2019 04:23 PM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
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प्रदूषण के असर से खून गाढ़ा हो रहा है जिसका असर नसों पर पड़ रहा है। इससे नसों के वाल्व खराब हो रहे हैं। अगर किसी को घंटों लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करना पड़ता है तो वह एहतियात बरते और थोड़ी-थोड़ी देर में चल-फिर ले, नहीं तो वेरीकोज वेन रोग की गिरफ्त में आ जाएगा। वेरीकोज वेन का अगर शुरुआत में इलाज हो जाए तो मर्ज ठीक हो जाता है। वेरीकोज वेन के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
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एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में दो साल में पांच सौ वेरीकोज वेन की लेजर सर्जरी की गई। रोगी की नसों में खून का थक्का जमने से हार्ट अटैक का खतरा रहता है। वेरीकोज वेन के रोगियों की संख्या बढ़ने और इलाज के संबंध में पांच सौ रोगियों पर इंस्टीट्यूट के सीनियर सर्जन डॉ. नीरज कुमार की रिसर्च रिपोर्ट जुलाई में दिल्ली में हुई एशिया-पैसिफिक वैस्कुलर कॉन्फ्रेंस में भी प्रस्तुत की गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण के अलावा खानपान में गड़बड़ी से मोटापा, हाई ब्लड शुगर, कोलेस्ट्राल और हाई ब्लड प्रेशर रोग बढ़ रहा है। वेरीकोज वेन होने से नसों में खून का संचार बाधित होता है जिससे पैरों में अल्सर हो जाते हैं। नसों का गुच्छा बन जाता है। नसें मोटी हो जाती हैं। घंटों बैठकर या एक ही स्थान पर खड़े रहने वाले इसकी अधिक चपेट में आते हैं।
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ऐसे होता है वेरीकोज वेन
पैर की नसें नीचे से खून दिल की ओर ऊपर ले जाती हैं। इनमें जगह-जगह वाल्व होते हैं जिससे खून नीचे नहीं आ पाता। वेरीकोज वेन में नसों के वाल्व खराब होते हैं। इससे खून भरा रहता है और पैरों में सूजन आ जाती है। नसें फैलकर गुच्छा बन जाती हैं। बाद में नसों के अल्सर बनने लगते हैं।

इलाज
कानपुर के मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सीनियर न्यूरो फिजिशियन डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि पहले नसों के गुच्छे को काटकर निकाल देते थे। अब कार्डियोलॉजी में लेटर एब्लेशन से इसे ठीक कर दिया जाता है।

केस- 1 विनोद वर्मा एक निजी कंपनी में सीनियर एग्जिक्यूटिव हैं। पांच साल से वेरीकोज वेन की गिरफ्त में हैं। दो सप्ताह पहले हार्ट अटैक पड़ा। जान बच गई। बाद में उनका लेजर से नसों के वाल्व का इलाज किया गया। वेरीकोज वेन में चलने में तकलीफ रही और दोनों पैरों में सूजन रहती थी।

केस- 2 एक रोगी के पैर में अल्सर हो गया। क्षेत्रीय डॉक्टरों के यहां दिखाने पर बताया गया कि कुष्ठ रोग हो गया। 25 साल से उसका कुष्ठ रोग का इलाज होता रहा। वह बहुत दिनों तक आगरा में भर्ती रहा। बाद में कार्डियोलॉजी में वेरीकोज वेन का इलाज हुआ तो ठीक हुआ।
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