विदेश जाने वालों के लिए भारतीय करेंसी ले जाने की सीमा 10 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। साथ ही नेपाल और भूटान जाने पर पांच सौ और हजार के नोट ले जाने पर लगी रोक हटा दी गई है।
यह बड़ी राहत देने वाली खबर है, क्योंकि इन दोनों देशों में जाने वाले यात्रियों को बड़े नोट पर पाबंदी के चलते तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ता था। हालांकि बढ़ी सीमा का लाभ पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को नहीं मिलेगा। इस बारे में कस्टम्स निदेशक ने सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर बोर्ड (सीबीईसी) और रिजर्व बैंक ने अलग-अलग अधिसूचना जारी की हैं।
अभी तक कोई भारतीय नागरिक विदेश जाता है या विदेश से भारत आता है तो अधिकतम दस हजार रुपये भारतीय मुद्रा अपने साथ ला सकता है और यहां से ले जा सकता है। अब मुद्रा अवमूल्यन एवं उत्पादों व सेवाओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी को देखते हुए यह सीमा बढ़ाकर 25 हजार कर दिया गया है।
बीती 16 जनवरी को डायरेक्टर (कस्टम्स) आरपी सिंह ने देश भर के सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर विभाग के चीफ कमिश्नरों एवं कमिश्नरों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि इस सीमा तक भारतीय मुद्रा लाने-ले जाने वाले यात्रियों को किसी प्रकार परेशान न किया जाए।
इसी तरह 22 जनवरी को आरबीआई की प्रिंसिपल चीफ जनरल मैनेजर अल्पना किलावाला ने एक आदेश जारी करते हुए नेपाल और भूटान में बड़े नोटों के साथ जाने पर लगी रोक को समाप्त कर दिया है। हालांकि हजार और पांच सौ के नोट पच्चीस हजार रुपये मूल्य तक ही ले जा सकेंगे। अभी तक इन दोनों देशों में किसी भी सीमा तक सौ से बड़े नोट नहीं ले जा सकते थे।
एक अन्य आदेश में सीमा शुल्क विभाग ने आयातकों-निर्यातकों को प्रक्रियागत झंझटों से मुक्ति देने का ऐलान किया है। बीती 15 जनवरी को जारी निर्देश में कहा गया है कि अभी तक किसी कंसाइनमेंट के बाहर जाने या देश में आने की स्थिति में आयातक-निर्यायत से जो कागजात कई संख्या में लिए जाते थे, उन्हें मात्र एक कॉपी लिया जाए।
उदाहरण के लिए इंपोर्ट जनरल मेनीफिस्ट की एक से लेकर छह प्रतियां विभिन्न पोर्ट पर ली जाती हैं, जो अब सिर्फ एक प्रति में ली जाएगी। इसी तरह शिपिंग कंपनीज एवं स्टीमर एजेंट द्वारा दाखिल किए जाने वाले विभिन्न गारंटी फॉर्मों को मर्ज करके एक गारंटी फॉर्म बना दिया गया है। इन सुविधाओं से आयातकों निर्यातकों को प्रोसीजरल सुविधा होगी।