रेंढर पुलिस की गिरफ्त में आरोपी चंद्रशेखर, बच्ची परी व उसकी मां सुनीता
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देश में लॉकडाउन के पहले गुजरात के रतनाम में एक फैक्टरी में पांच साल तक एक साथ नौकरी करने वाले दो दोस्तों के परिवार की महिलाओं के बीच कोरोना संकट के बाद ऐसा मनमुटाव हुआ कि दोस्ती रंजिश में बदल गई। एक ने दूसरे दोस्त की पत्नी से रंजिश रखते हुए उसकी तीन साल की बच्ची परी को ही सोमवार को सुबह अगवा कर लिया।
शुक्र है कि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर मंगलवार की सुबह बच्ची को जहां सकुशल ढूंढ निकाला, वहीं आरोपी को भी दबोच लिया। रेंढर थाना क्षेत्र के अतरौली गांव निवासी प्रवासी मजदूर विनय दोहरे और पड़ोसी चंद्रशेखर पुत्र शिवचरण गुजरात में एक साथ जहां एक फैक्टरी में नौकरी करते थे, वहीं आसपास ही परिवार संग रहते थे।
लॉकडाउन के बाद दोनों परिवार संग गांव चले आए। इस दौरान दोनों परिवारों के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया और चंद्रशेखर ने विनय की पत्नी सुनीता से कुछ ज्यादा ही रंजिश रखने लगा। सोमवार की सुबह विनय की मासूम बेटी परी (तीन) घर के बाहर खेलने के दौरान अचानक लापता हो गई।
बेटी के अचानक लापता होने और पड़ोसी चंद्रशेखर का भी कुछ पता न चलने से सशंकित विनय पत्नी सुनीता संग थाने पहुंचकर पुलिस को जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ माधौगढ़ वीरेंद्र श्रीवास्तव ने तत्काल ही थाने की फोर्स के साथ जंगलों में परी की तलाश शुरू कर दी।
रातभर पुलिस और ग्रामीण टार्च की रोशनी संग बच्ची को जंगल में तलाशते रहे। मंगलवार की सुबह करीब दस बजे पुलिस को सूचना मिली कि एक संदिग्ध व्यक्ति क्षेत्र के गड़ेरना गांव में एक बच्ची संग देखा गया है। इस सूचना पर थाना प्रभारी योगेंद्र पटेल ने फोर्स संग फौरन दबिश देकर मासूम परी संग आरोपी चंद्रशेखर को दबोच लिया।
इसके बाद थाने लाकर परी को उसकी मां सुनीता के सुपुर्द कर दिया। सीओ का कहना है कि आरोपी और पीड़ित विनय दोनों ही गुजरात में काम करते थे। बताया कि चंद्रशेखर किसी बात को लेकर सुनीता से रंजिश रखने लगा था लॉकडाउन में ही दोनों के परिवार वापस गांव लौटे थे। उसी रंजिश में चंद्रशेखर ने बच्ची को अगवा किया था। फिलहाल आरोपी को जेल भेजा जा रहा है।
टाफी देने के बहाने ले गया था---
तीन साल की बच्ची परी ने पुलिस को बताया कि अंकल उसे टाफी दिलाने के बहाने ले गए थे। इसके बाद उसे एक गाड़ी (सवारी वाहन) से कहीं ले गए और रात भर एक घर में रखकर खाने को सिर्फ बिस्कुट ही दिए। मां का नाम लेने पर अंकल ने उसे पीटा भी था।
अनहोनी भी हो सकती थी---
सोेमवार की रातभर बच्ची के न मिलने से जहां परिजन दहशत में थे, वहीं गांव वालों के माथे पर भी चिंता की लकीरें दिखाई दे रही थी। सभी को लग रहा था कि कहीं बच्ची के साथ कोई अनहोनी न हो जाए, लेकिन जैसे ही बच्ची मिली तो सभी ने राहत की सांस ली।
पुलिस कार्रवाई की गांवभर में प्रशंसा
अक्सर अपने कारनामों से फजीहत का सामना करने वाली पुलिस के लिए काफी समय बाद ऐसा मौका आया, जब ग्रामीणों की जुबान पर पुलिस की प्रशंसा थी। चौबीस घंटे के भीतर बच्ची को खोजने को लेकर हर कोई पुलिस की तारीफ करता नजर आ रहा था।