माता-पिता समेत सात गवाह कोर्ट में पेश किए
कुछ दिन बाद मां-बाप के सख्ती से पूछने पर किशोरी ने सारी बात बताई। तब 17 अगस्त को पिता ने पनकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि अभियोजन की ओर से पीड़िता व उसके माता-पिता समेत सात गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने विनोद को दोषी मानकर सजा सुनाई। जुर्माने के 60 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।
23 अगस्त 2023 को चार्जशीट, 16 अप्रैल को आरोप तय
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने छह दिन में ही 23 अगस्त 2023 को चार्जशीट कोर्ट भेज दी थी। 16 अप्रैल 2024 को कोर्ट ने विनोद के खिलाफ आरोप तय किए थे और पांच माह में ही अभियोजन के सात व बचाव पक्ष के दो गवाहों की गवाही कराकर और अभियोजन कार्यवाही पूरी करके कोर्ट ने मुकदमे का फैसला सुना दिया।
डॉ. वर्षा की रिपोर्ट विधि विरुद्ध: कोर्ट
पीड़िता का मेडिकल करने वाली डॉक्टर ने मेडिकल परीक्षण में घोर लापरवाही की। इस पर कोर्ट ने सीएमओ और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लखनऊ के प्रमुख सचिव को निर्देशित किया है कि डॉ. वर्षा के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई करके जानकारी कोर्ट को भेजें।
कई अन्य फाइलों में भी ऐसा ही किया
कोर्ट ने कहा कि डॉ. वर्षा ने परीक्षण रिपोर्ट विधि अनुसार न बनाकर अधूरी, भ्रमित करने वाली व त्रुटिपूर्ण बनाई। रिपोर्ट में यह नहीं लिखा है कि पीड़िता के हाईमन का स्टेटस क्या है। डॉ. वर्षा की रिपोर्ट विधि विरुद्ध, पीड़िता के साथ अन्याय और अभियुक्त को अनुचित लाभ पहुंचाने वाली है। भावना गुप्ता ने बताया कि डॉ. वर्षा वर्तमान में सीएचसी कल्याणपुर में तैनात हैं। कई अन्य फाइलों में भी इन्होंने ऐसा ही किया है।