यह उत्तर पुस्तिकाएं पूर्वा एक्सप्रेस के जरिए डाक विभाग के कोच के माध्यम से विश्वविद्यालय आनी थी। सूत्रों ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं के साथ दो और बैग थे, जिसमें उत्तर पुस्तिकाएं थीं। वो बैग गायब है, जबकि अन्य दो बैग मिल चुके हैं। इस बैग का भार करीब चार से पांच किलो था। सूत्रों ने बताया कि विभाग के रेल मेल डाक के अधीक्षक एसके गुप्ता और उच्च अफसर पूरा मामला दबाए रहे।
अब मामला खुलने पर संयुक्त कमेटी बनाई गई है। इसमें कानपुर व प्रयागराज मंडल के अफसर शामिल हैं। बताया गया कि एक पूर्वा एक्सप्रेस के चलने के स्थान से लेकर उसके अंतिम स्थान हावड़ा तक उत्तर पुस्तिकाओं को ढूंढा गया है, लेकिन उत्तर पुस्तिकाएं नहीं मिल पाई हैं।
मेल लिस्ट का सत्यापन ही नहीं किया गया
सूत्रों ने बताया कि डाक विभाग के कोच के जरिए जो भी सामान आता है। उसकी एक मेल लिस्ट दी जाती है, जो सामान चढ़ने और उतरने पर मिलाया जाता है। इस पूरे मामले में मेल लिस्ट का भैतिक सत्यापन तक नहीं किया गया। यदि सत्यापन किया गया होता, तो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न होता है।