कानपुर। ईशा हत्याकांड में अपर जिला जज चतुर्थ शुचि श्रीवास्तव ने बुधवार को पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि बाकी पांच को बरी कर दिया। मुकदमे में ज्ञानेंद्र ने विवेचक द्वारा विभागीय दुर्भावना के चलते गलत तरीके से चार्जशीट दाखिल करने का तर्क रखा था। दूसरी तरफ कोर्ट ने माना कि विवेचक ने विवेचना में घोर लापरवाही बरती। ज्ञानेंद्र को लाभ पहुंचाने की पूरी कोशिश की गई।
ज्ञानेंद्र और ईशा के बीच वैवाहिक संबंध थे। ईशा 18 मई से 22 मई तक लापता थी लेकिन ज्ञानेंद्र ने कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि वह खुद भी कोर्ट में समर्पण करने यानि आठ जून तक गायब रहा। ज्ञानेंद्र द्वारा ईशा को मंदिर दर्शन के बहाने घर से ले जाना, परिवार वालों से फोन पर बात करना, महेवा घाट पुल पर ईशा की सिरकटी लाश का मिलना, ज्ञानेंद्र की निशानदेही पर आलाकत्ल की बरामदगी, ईशा को ले जाने में इस्तेमाल की गई कार में मानव रक्त का पाया जाना आदि कड़ियों को जोड़कर कोर्ट ने ज्ञानेंद्र को ईशा की हत्या का दोषी करार दिया।
ईशा ज्ञानेंद्र के साथ गई थी इसलिए ज्ञानेंद्र को यह साबित करना था कि ईशा की कब, कहां और कैसे हत्या हुई लेकिन वह साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर कोर्ट ने ज्ञानेंद्र को उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं ईशा की हत्या की साजिश किस स्थान व किस समय बनी, साजिश रचते वक्त वहां कौन-कौन मौजूद था इसका कोई सबूत अभियोजन पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने माना कि सिर्फ ईशा के पर्स या कंगन की बरामदगी से मनीष को हत्या का दोषी नहीं माना जा सकता।
विकास के पास से न तो ईशा का कोई सामान बरामद हुआ, न आलाकत्ल जिससे उसके हत्या या सबूत मिटाने में शामिल होने के सबूत मिले। अवंतिका के पास से ईशा के मोबाइल की बरामदगी दिखाई गई। इसके बाद ही एक-एक कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी और घटना के खुलासे की बात कही गई लेकिन सीडीआर नहीं निकलवाई गई। न ही अवंतिका की आवाज की फाॅरेंसिक जांच कराई गई। इससे साबित हो सकता था कि अवंतिका ने ही प्रियंका बनकर ऐश्वर्य को फोन करके ईशा द्वारा दूसरी शादी करने की बात कही थी।
अर्जुन और अवंतिका को कहीं ईशा के साथ देखा भी नहीं गया। न ही दोनों के पास से हत्या में इस्तेमाल किसी हथियार की बरामदगी हुई। अवंतिका और अर्जुन के पास से मोबाइल व कंगन की बरामदगी से उनके हत्या में शामिल होना साबित नहीं होता। आदर्श सविता पर ज्ञानेंद्र को शरण देने का आरोप था लेकिन इसके संबंध में भी अभियोजन कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। इस आधार पर कोर्ट ने मनीष, विकास, अर्जुन, अवंतिका और आदर्श को बरी कर दिया।