जिला अस्पताल गेट पर मां के साथ लेटी बीमार युवती।
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गेट पर तेज बुखार से पीड़ित युवती अपने मां की गोद में लेटी बस यही दुआ कर रही थी कि किसी तरह उसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज मिल जाए। वहीं जौनपुर से आए एक और दंपति का यही हाल था। लेकिन डॉक्टर इलाज करने को तैयार ही नहीं थे। वे बस मरीजों को रेफर करने में जुटे थे।
यह पहला वाकया नहीं है जब चित्रकूट जिला अस्पताल में लोगों को इलाज नहीं मिला। इससे पहले भी कई बार डॉक्टरों के ये कारनामे सामने आते रहे हैं।
कभी डाक्टरों की कमी तो कभी उपकरण कम होने का बहाना बनाकर स्टाफ मरीज को रेफर ही करते हैं। बुधवार को अपनी बेटी इंद्रामणि का इलाज करना पहुंची ऐंचवारा के गजटा निवासी गोलिया देवी ने बताया कि बेटी को तीन दिनों से तेज बुखार है।
उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची तो पहले किसी डाक्टर ने उसका इलाज ही नहीं किया। इसके बाद आपातकालीन वार्ड में कुछ प्राथमिक दवाएं देकर जानकीकुंड रेफर कर दिया गया। महिला ने बताया कि बार बार गरीबी के कारण यहीं इलाज कराने को वह कहती रही लेकिन किसी पर इसका असर नहीं हुआ। उसके पास रुपये भी नहीं थे। लगभग दो घंटे तक अस्पताल गेट में बेटी को लेकर बैैठी रही इसके बाद गांव से परिजन कुछ रुपये लेकर आए और टेपों से जानकीकुंड पहुंचे।
इसके अलावा जौनपुर से परिवार समेत चित्रकूट घूमने आए संतोष पांडेय का को सीतापुर के पास अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया। पत्नी पुष्पा देवी उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंची जहां इलाज में लापरवाही की गई। कुछ दवाएं देकर मौजूद डाक्टर व स्टाफ ने इलाहाबाद रेफर कर दिया।
वह बार बार कहती रही कि मरीज को भर्ती तो कर लो। लेकिन स्टाफ ने मना कर दिया। इसके बाद वह बीमार पति को लेकर दो घंटे तक अस्पताल गेट में खड़ी रहीं। किसी तरह टेपों से पति को लेकर बस स्टैंड पहुंची फिर इलाहाबाद की बस में बैठकर रवाना हो गए। इस मामले में सीएमएस डा.एनके गुप्ता ने कहा कि दोनों घटनाओं की जानकारी उन्हें नहीं है।