ऐसे प्रश्नों को समझने और उत्तर देने में अभ्यर्थियों को अधिक समय लगा। उन्होंने बताया कि इस बार परीक्षा में प्रश्नों की संख्या 200 से घटाकर 180 कर दी गई थी। प्रश्नपत्र को समयबद्ध सेक्शन में बांटा गया था। इससे समय प्रबंधन में कुछ आसानी हुई, लेकिन एक बार सेक्शन लॉक होने के बाद दोबारा पीछे जाकर प्रश्न देखने का विकल्प नहीं होने से अभ्यर्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ा।
माता-पिता के लिए भी परीक्षा जैसा अनुभव
कानपुर विश्वविद्यालय के दयानंद विधि महाविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महामंत्री अनुज कुमार दीक्षित एडवोकेट ने नीट पीजी परीक्षा को लेकर कहा कि यह केवल छात्रों की परीक्षा नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और परिवार की भी परीक्षा होती है। छात्र रात-रात भर पढ़ाई करते हैं, वहीं माता-पिता भी उनकी तैयारी और भविष्य को लेकर चिंता में जागते रहते हैं।