नीट में फर्रुखाबाद का नाम रोशन करने वाला अंकित
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गरीबी को हराकर मेधावी कैसे आगे बढ़ जाते हैं यह सीख फर्रुखाबाद के अंकित कुमार से लेनी चाहिए। 5694 रैंक हासिल करने वाले अंकित के पिता राम सिंह 12 साल पहले सब कुछ छोड़कर बौद्घ भिक्षु बन गए थे। कमाई का कोई जरिया नहीं था तो पूरा परिवार खेती करने लगा।
मां सुहागश्री भी अपने सभी छह बच्चों को हर कीमत पर आगे बढ़ाना चाहती थीं। मां के सपने को पूरा करने के लिए बड़े भाई ने खेती करके खुद के साथ भाई और बहनों की शिक्षा जारी रखी। अंकित बताते हैं कि बड़े भाई राजीव ने एसएससी क्वालीफाई करके आयकर विभाग में नौकरी हासिल कर ली।
यह परिवार की पहली सफलता थी। अंकित बताते हैं कि 12वीं तक उन्हें मालूम भी नहीं था कि डॉक्टर कैसे बनते हैं। जब बीएससी करने के लिए एक डिग्री कॉलेज में एडमिशन लिया तो वहां दोस्तों से मालूम हुआ कि इसके लिए नीट की परीक्षा देनी पड़ती है। तब मैंने भी डॉक्टर बनने की ठान ली।
बड़े भाई को बताया तो उन्होंने मुझे कानपुर भेज दिया। यहां डॉ. दिलीप गंगवार इंस्टीट्यूट से कोचिंग की और दूसरी बार में ही सफलता हासिल कर ली। अंकित बताते हैं कि वह डॉक्टर बनकर अपने गांव के लोगों की मदद करना चाहते हैं। गांव में अभी भी लोग इलाज न मिलने के चलते मर जाते हैं।