मान्यता है कि काली मठिया मंदिर में 41 दिन लगातार सुबह और शाम की आरती में शामिल होने या नवरात्र में मन्नत की चुनरी बांधने से माता रानी मनोकामना को पूरा करती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद भक्त चुनरी खोलकर मां का शृंगार करते और प्रसाद चढ़ाते हैं।
कानपुर में शास्त्रीनगर स्थित काली मठिया मंदिर करीब 150 साल पुराना है। मंदिर के प्रधान पुजारी उमेश चंद्र तिवारी बताते हैं कि इस स्थान पर एक टीला हुआ करता था। एक जड़ में ही पाकड़, पीपल, नीम, गूलर और बरगद का पेड़ था। उस टीले पर एक गाय रोजाना आकर दूध छोड़ जाती थी।
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इसके चलते लोगों ने टीले की खोदाई की तो मां काली की मूर्ति निकली, जिसको काली मठिया के रूप में स्थापित किया गया। वर्ष 1971 में पुरी से आए आदिगुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मंदिर में अब मां की एक विशाल मूर्ति स्थापित है, लेकिन पुरानी छोटी मूर्ति को भी मंदिर में ही एक स्थान पर स्थापित किया गया है।
मां काली के उपासक रोजाना यहां पर आकर मां के दर्शन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि 41 दिन लगातार सुबह और शाम की आरती में शामिल होने या नवरात्र में मन्नत की चुनरी बांधने से माता रानी मनोकामना को पूरा करती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद भक्त चुनरी खोलकर मां का शृंगार करते और प्रसाद चढ़ाते हैं। यहां पर शनिवार को ज्यादा भक्त आते हैं। मंदिर के प्रबंधन का काम देखने वाले बलदेव सिंह ने बताया कि मंदिर में चार समय की आरती होती है।