शारदीय नवरात्र की शुरुआत दस अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र में होगी। इस बार मातारानी नौका पर सवार होकर आएंगी। वहीं, नवरात्र का समापन 18 अक्तूबर को होगा। मां भक्तों के कंधे पर विदा होंगी। महामहोपाध्याय आदित्य पांडेय का कहना है कि यह बड़ा ही शुभ मौका है।
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देवी भगवत पुराण के अनुसार जब मां का आगमन नौका से होता है तो वह भक्तों की सभी इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। भक्त को सभी कष्टों के समुद्र से बाहर निकालतीं हैं। नवरात्र में मातारानी का विधि-विधान से पूजन अर्चन करने वाले भक्तों को पुण्य फल की प्राप्ति होगी।
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इन मंदिरों में उमड़ेंगे भक्त
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नवरात्र में कानपुर के बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी देवी मंदिर, जूही स्थित बारादेवी मंदिर, किदवईनगर स्थित जंगली देवी मंदिर, शास्त्रीनगर स्थित काली मठिया, बंगाली मोहाल स्थित काली देवी मंदिर और हटिया स्थित बुद्धादेवी मंदिर में भक्त पूजन-अर्चन को उमड़ेंगे। इसके अलावा चकेरी में काली मठिया मंदिर और गोविंदनगर स्थित दुर्गा मंदिर समेत अन्य कई मंदिरों में भी मातारानी का पूजन-अर्चन होगा। नवरात्र के लिए इन मंदिरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
बंग समाज की पूजा सप्तमी से शुरू होगी
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बंग समाज 15 अक्तूबर को सप्तमी से मइया की पूजा-अर्चना शुरू करेगा। यह पूजा नवमी तक चलेगी। इन तीन दिनों तक मातारानी की पूजा के साथ धार्मिक आयोजन भी होंगे। इसके बाद मां की प्रतिमा को विसर्जित किया जाएगा।