उनके अभिनय का जादू लोगों के सिर चढ़ता गया। 45 साल तक रंपत के साथ नक्कारा बजाने वाले हरिश्चंद्र ने बताया कि पहले वह दूसरों के थिएटर में काम करते थे। फिर 1990 में रंपत हरामी नाम से अपनी कंपनी बना ली। कंपनी का नाम अजीब सा था तो लोगों के जुबां पर चढ़ गया और देश-विदेश तक लोग इसे जानने लगे। इसके बाद कई बार कंपनी का नाम बदला और आखिरी बार इसका नाम रंपत रानी बाला नौटंकी कर दिया।
उर्सला में सप्ताह में दो दिन होती थी डायलिसिस
रंपत की बेटी निहारिका उर्फ कशिश, दामाद दिलीप सिंह ने बताया कि बीमारी के बाद भी वह नौटंकी में हिस्सा लेते रहे। उर्सला में सप्ताह में दो दिन उनकी डायलिसिस होती थी। फिर भी नौटंकी नहीं छोड़ी। 28 अप्रैल को उन्नाव के शिवानी खेड़ा में कार्यक्रम करके आए थे और मंगलवार को उन्हें नौटंकी के लिए गोंडा जाना था। वह चार दिन पहले बिस्तर से नीचे गिर गए थे। उसके बाद हालत गंभीर हो गई। अभी उनका परिवार बगाही बाबूपुरवा में रहता है।
अवार्ड मिले, यू ट्यूब पर क्रेज
रंपत के अभिनय के दीवानों की यू ट्यूब पर भी कमी नहीं है। उनकी नौटंकी देश-विदेश में मशहूर है। आम आदमी से लेकर मेडिकल छात्र, आईआईटीयंस और दूसरे पेशों के लोग भी उन्हें पसंद करते हैं। उन्हें सरस सलिल अवार्ड-2018 तथा मेलों के दर्जनों अवार्ड मिले हैं। संगीत नाट्य अकादमी समेत विभिन्न संगीत संस्थान अपने कार्यक्रमों में उन्हें बुलाते थे।