कानपुर। शंकर जी के अनुरोध पर भरत मुनि ने देवताओं के मनोरंजन के लिए पंचम वेद नाट्य शास्त्र की रचना की थी। प्राचीन काल में संस्कृत में नाटक लिखे और खेले जाते थे।
यह बात आज भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ व अनुकृति रंगमंडल कानपुर के संयुक्त तत्वावधान एवं संस्कार भारती के सहयोग से आयोजित रंग पाठशाला में तीसरे दिन वरिष्ठ रंगकर्मी प्रशिक्षक डाॅ. ओमेंद्र कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि अगर इरादा पक्का हो तो मंजिल जरूर मिलती है।
इस दौरान हुई बारिश के बावजूद दीपिका सिंह, संध्या सिंह, राम गोपाल, सम्राट यादव, जिज्ञासा शुक्ला, आकाश शर्मा, शांति गुप्ता, वंदना बाजपेई समेत 20 से अधिक प्रतिभागी मौजूद रहे।