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राष्ट्रीय ध्वज फहराना और राष्ट्रगान गाना इस्लाम की मान्यताओं में बाधा नहींः महमूद मदनी

Mon, 16 Oct 2017 09:06 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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मौलाना महमूद मदनी - फोटो : अमर उजाला
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कानपुरः जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि मंदिर विवाद का हल आपसी सहमति से होने का समर्थन किया है। इसके पहले बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल ने भी आपसी सहमति से मसले को हल करने की बात कही थी। इसका समर्थन करते हुए मदनी ने कहा कि अगर आपसी बातचीत में किसी मुद्दे के हल होने की गुंजाइश है, तो ऐसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में बयानबाजी नहीं करेंगे, क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। वह सिविल लाइंस में हुए एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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हज नीति पर हल्ला खड़ा करने की जरूरत नहीं है

महमूद मदनी - फोटो : अमर उजाला
मौलाना महमूद मदनी ने केंद्र सरकार द्वारा हज नीति में बदलाव के मुद्दे पर हो रहे विवाद पर कहा कि ज्यादा हो हल्ला खड़ा करने की जरूरत नहीं है। हज नीति में बदलाव करना प्रस्तावित है। अगर किसी तरह के बदलाव की गुंजाइश होगी तो सहयोग करना चाहिए। अकेली महिला को हज करने की अनुमति पर भी विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि मुस्लिमों में भी शाफई मसलक (केरल में बहुलता) में अकेले महिला को हज करने की अनुमति है। इसलिए जो जा सकता है, उसके लिए नीति में बदलाव करने में कोई हर्ज नहीं है। मुस्लिम शान से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और राष्ट्रगान गाते हैं। ऐसा करना इस्लाम की मान्यताओं में कोई बाधा नहीं है। मुस्लिमों पर जो आरोप लग रहे हैं, बेबुनियाद हैं। 

 
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रोहिंग्या यदि सुरक्षा के लिए खतरा तो मुसलमान इनके विरोधी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी - फोटो : अमर उजाला
रोहिंग्या मुसलमानों के मसले पर उन्होंने कहा कि बात राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की है तो भारतीय मुसलमान इसके सबसे बड़े विरोधी होंगे। इसके बावजूद अगर मामला इंसानियत का है तो भारत की सभ्यता 5000 साल पुरानी कौमी एकता और इंसानियत की है। जिस दिन इसमें राजनीति नहीं होगी, रोहिंग्या मुसलमानों का मसला इंसानियत के आधार पर हल हो जाएगा।

 
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