आत्मनिर्भर और संस्कारित बन सकेंगी बालिकाएं
देवी राधिके ने बताया कि दिसंबर माह से किशोरी गुरुकुलम नामक पहल के माध्यम से वे निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था शुरू कर रही हैं, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ गुरुकुल प्रणाली के संस्कार भी दिए जाएंगे। बालिकाओं को भोजन, वस्त्र और शास्त्रों की जानकारी के साथ पूजा पद्धति की शिक्षा भी दी जाएगी, जिससे वे आत्मनिर्भर और संस्कारित बन सकें।
पिता भी कर रहे हैं भरपूर सहयोग
देवी राधिके अपनी दिनचर्या महाभगवत कथा,सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में गुजार रही है। उनके इस नेक कार्य में पिता आनंद चिन्मय भरपूर सहयोग भी कर रहे है। ग्रामीणों ने कहा ऐसे लोग जो बिना किसी लालच बिना किसी प्रचार के समाज के लिए जीते हैं, वही वास्तव में देवदूत कहलाते हैं। राष्ट्रीय देवदूत दिवस के अवसर पर देवी राधिके जैसे व्यक्तित्व को नमन है, जिन्होंने समाज की आत्मा को जीवित रखते हुए सेवा को अपना धर्म मान रही हैं।