लखनऊ के स्मारक घोटाले में आरोपी बसपा सरकार के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत इस मामले में घसीटा जा रहा है। इस प्रकरण की किसी भी फाइल में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। कहा कि फाइल में कहीं भी मेरे हस्ताक्षर मिल जाएं तो बिना जांच के खुद को दोषी मान लूंगा।
शुक्रवार को गृह जनपद बांदा आए एमएलसी व कांग्रेसी नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि घोटाले की एफआईआर वर्ष 2013 में सपा सरकार में दर्ज कराई गई थी। तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा का कार्यकाल 8 वर्ष किए जाने के लिए विधान परिषद में बिल लाया गया था। तब मैं नेता विरोधी दल था। मेरे विरोध के चलते बिल पारित नहीं हो सका। कथित घोटाले की एफआईआर में उन्हें शामिल किया जाना इसी का नतीजा है।