हुसैनी फेडरेशन की ओर से रविवार को परेड ग्राउंड में आयोजित हुसैन दिवस में सभी ने एक सुर में आतंकवाद और आईएसआईएस की निंदा की। कहा कि कोई भी धर्म आतंकवाद की शिक्षा नहीं देता है। सभी करुणा और दया सिखाते हैं।
हुसैन दिवस पर हजरत इमाम हुसैन की इंसानियत के लिए पेश की गई कुर्बानी से प्रेरणा लेने की हिदायत दी गई। कार्यक्रम में मुस्लिम धर्मगुरुओं के अलावा दिल्ली संत समिति के अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम भी शामिल हुए।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कट्टरता से अलगाववाद बढ़ता है और अलगाववाद से आतंकवाद पनपता है।
एके 47 पकड़कर इंसानों का कत्ल करने वाले आईएसआईएस और अलकायदा का किसी भी धर्म से लेना देना नहीं है। इस्लाम अमन की शिक्षा देता है। आईएसआईएस बेगुनाहों को मारता है, वह मुसलमान नहीं। जो दादरी में निहत्थे अखलाक की हत्या करते हैं, वह सच्चे हिंदू नहीं। हिंदू धर्म करुणा, दया और क्षमा का नाम है।
लखनऊ के शिया आलिम मौलाना सैयद उरूजुल हसन मीसम ने कहा कि सभी धर्म सत्य और अहिंसा की सीख देते हैं। आईएसआईएस इस्लाम का लबादा ओढ़कर एक तो मुसलमानों को बदनाम कर रहा है, दूसरे इंसानों का कत्ल कर क्रूरता का संदेश दे रहा है।
मुस्लिम युवाओं को इससे सावधान रहने की जरूरत है। आईएसआईएस पश्चिमी देशों के स्पॉंसरशिप से चल रहा है। महाराष्ट्र मालेगांव से आए मौलाना अमीर हमजा अशरफी ने कहा कि आईएसआईएस नाम के मुसलमान हैं। यह असलियत में यहूदी हैं।
पैगंबर-ए-इस्लाम ने इस्लाम के नाम पर अमन और शांति का संदेश दिया। जौनपुर से आए मौलाना डा. सैयद काजिम मेंहदी ने कहा कि इमाम हुसैन ने सिखाया जान दे दो लेकिन जान लो नहीं। जबकि आईएसआईएस जान लेता है। कार्यक्रम में 25 गरीब, विधवाओं और बेसहारा महिलाओं को सिलाई मशीनें बांटी गईं। हाईस्कूल की मेधावी जौन एलिया, फराह फातिमा, कुमैल अब्बास और इंटर की अजमतुन्निशां खान, आरिफान जीशान, सैयदा असीर फातिमा रिजवी को सम्मानित किया गया।