पोस्टमार्टम के बाद मुस्लिम समुदाय के पड़ोसियों मोहम्मद ताहिर, रजाउद्दीन, मोहम्मद अनस अंसारी, साबिर, मोहम्मद इस्लाम आदि ने हिंदू रीति-रिवाज से अर्थी को कंधा देकर शव को दफन कराया। आपस में चंदा कर अर्थी से लेकर अंतिम क्रिया का इंतजाम किया।
इस दौरान लोग चर्चा करते रहे कि जाति, धर्म से बढ़कर इंसानियत होती है और अंत में इंसान ही इंसान के काम आता है। लोगों ने कहा कि क्या फर्क पड़ता है कि कौन मरा, सिर्फ इतना जानते हैं इंसान की मौत हुई और इंसानियत के लिए ये काम किया।