2005 में हुआ था दूसरा विवाह
आरोपियों ने बताया कि 15 वर्ष की उम्र में उसकी शादी डकोर थाना क्षेत्र के गोरन टिमरों गांव निवासी रमा के साथ हुई थी, लेकिन एक वर्ष बाद वह उसे छोड़कर चली गई थी। इस पर 2005 में मंजू के साथ उसका दूसरा विवाह हुआ। उसने बताया कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसने अपने चाचा रामहेत के साथ योजना बनाई।
चित्रकूट में भी किया था प्रयास
वह उसे घुमाने के बहाने चित्रकूट ले गए, लेकिन वहां उसकी हत्या करने में सफल नहीं हुए। लौटते समय उसने कालपी में लगे तंबू का सरिया उखाड़कर 31 दिसंबर 2006 को मंजू के सिर हमला कर उसे मार दिया था। चाचा रामहेत के साथ मिलकर शव को कब्रिस्तान के पास फेंककर भाग गए थे।
शिनाख्त ने होने से पुलिस नहीं पकड़ पाई
चाचा के कहने पर सरिया को अपने घर में छिपा दिया था। उस समय मंजू की लाश मिलने पर पुलिस ने उसके शव की शिनाख्त कराने का प्रयास किया था, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका था। इससे दोनों आरोपियों को यकीन हो गया था, कि पुलिस उन्हें नहीं पकड़ पाएगी।
मंजू के परिजनों ने नहीं मानी हार
आरोपी संतोष ने बताया कि मंजू की हत्या के बाद वह आराम से उरई में ही रह रहा था, लेकिन मंजू के परिजन उसके पीछे पड़ गए। इससे वह कानपुर देहात के माचा गांव में पिछले 15 वर्ष से किराए के मकान में रह रहा था। आरोपी ने बताया कि उसने तीसरी शादी कर ली है।
माचा गांव में रह रहे थे आरोपी
पत्नी माचा गांव में है। आरोपी संतोष ने घटना के 17 वर्ष बीत जाने के बाद भी इसकी जानकारी किसी को नहीं होने दी, लेकिन उसने अपने मोहल्ले के ही मथुरा प्रसाद कुशवाहा से हत्या करने की बात कबूली। इस पर पुलिस को उसकी रिकॉर्डिंग भी मिल गई।