यूपी विधानसभा चुनाव में कुछ ऐसे नेता भी थे जिनके सिर पर मुलायम सिंह का हाथ था। इन नेताओंं ने इस चुनाव में अपनी नैया पार लगाने के लिए नेताजी की शरण ली थी। लेकिन इन्हें नहीं मालूम था नेताजी(मुलायम सिंह) को ही साइड लाइन कर दिया जाएगा।
गजब की बात ये है कि नेताजी की शरण में आने वाले इन नेताओं में कुछ नेता सपा से बाहर के थे तो कुछ सपा के दामन छोड़ दुसरे दलों का दामन थाम चुके थे। चुनाव से पहले इन नेताओंं को लेकर तमाम तरह के व्यंग्य भी चले। कहा गया बाप-बेटे की लड़ाई में बाहर वाले सही फायदा उठा रहे हैं। अब आपको बतातें हैं नेताजी के आशीर्वाद को ये नेता कैश कर पाए या नहीं...
सपा के बागी और बाहरियों की ये थी निति
चुनाव से पहले लोकदल के नेता आशीष राजपूत अपनी नैया पार लगाने के लिए नेताजी के चरणों में पहुंचे थे
इटावा विधानसभा चुनाव मैदान में सपा के बागी के रूप में लोकदल से उतरे आशीष राजपूत को मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद भी सम्मानजनक स्थिति में नहीं पहुंचा सका। यहां तक कि डेढ़ वर्ष पूर्व जिला पंचायत सदस्य की सीट से उन्हें जितने वोट मिले थे, उसके बराबर भी इस चुनाव में मत हासिल नहीं कर सके।
सपा में चली पारिवारिक कलह के दौरान रामगोपाल यादव गुट के गोपाल यादव के जिलाध्यक्ष बनने उनके साथ रहने वाले आशीष राजपूत नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही बदल गए। सपा से अलग होकर लोकदल से नामांकन कराया। मुलायम के लोग ही उसके नामांकन कराने पहुंचे। आशीष स्वयं शिवपाल के आशीर्वाद से चुनाव मैदान में उतरने की बात कहते रहे और शिवपाल सिंह यादव ने भी उनकी बात को नहीं काटा।
शिवपाल सिंह यादव की चुनावी सभाओं में मुलायम से मिलने पहुंचे थे बागी
मुलायम सिंह (फाइल फोटो)
मजे की बात तो ये रही कि शिवपाल सिंह यादव की चुनावी सभाएं करने आए मुलायम सिंह यादव से आशीष राजपूत आशीर्वाद लेने से नहीं चूके। मंच पर पहुंचकर बकायदा जनता के बीच आशीर्वाद लेने का कार्यक्रम दिखाया। मगर मुलायम का आशीर्वाद उन्हें सम्मानजनक स्थिति नहीं दिला पाया।
इटावा विधानसभा सीट से लोकदल प्रत्याशी के रूप में उतरे आशीष राजपूत को महज 1203 मत ही हासिल कर सके। जो उनका अब का सबसे खराब प्रदर्शन रहा। इससे पूर्व वह क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुके। बेशक उन चुनावों में भी वह नहीं जीते मगर वोट तो इनसे अधिक पा सके।