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चौहान ‘चेते’, योगी राज में नहीं बना ‘योग’

Sat, 17 Jun 2017 09:50 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अवैध खनन पर योगी सरकार से ज्यादा सख्त शिवराज सरकार
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योगी राज में भले ही बुंदेलखंड की भाग्य रेखा केन नदी को अवैध खनन से बचाने का ‘योग’ न बन पाया हो, लेकिन पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले में ‘चेत’ गए हैं। एमपी में केन नदी खदानों पर हो रहे अवैध खनन पर चौहान सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। स्पेशल टास्क पुलिस ने खदानों को घेर कर 22 पोकलैंड और जेसीबी और चार लिफ्टर मशीनें जब्त कर ली हैं। खदानों में भारी संख्या में पुलिस तैनात कर दी गई है। बालू माफियाओं में हड़कंप मच गया है। 
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मध्य प्रदेश के पन्ना से लेकर बांदा के चिल्ला तक केन नदी में जगह-जगह बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन हो रहा है। जिससे नदी की जलधारा बाधित हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और हाईकोर्ट के कई आदेश भी इस अपराध को नहीं रोक पाए। यूपी-एमपी दोनों राज्यों में अब भाजपा की सरकारें हैं। पिछले कुछ दिनों से अवैध खनन में और तेजी आ गई है। जगह-जगह केन नदी की जलधारा में लिफ्टर और मशीनों से बालू निकालकर नदी को गहरा करने के साथ ही जलधारा मोड़ रहे हैं। गहराई बढ़ने से जल धारा आगे नहीं बढ़ पा रही। 
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अवैध खनन पर एमपी सरकार ने सुध ली

अवैध खनन पर योगी सरकार से ज्यादा सख्त शिवराज सरकार
अवैध खनन पर आखिर एमपी सरकार ने सुध ली है। अब तक की सबसे बड़ी छापा मार कार्रवाई करते हुए पन्ना (एमपी) पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स ने बुधवार यानी 14 जून को सुबह 5 बजे अजयगढ़ तहसील में स्थित केन नदी की खदानों को घेर लिया। इसके अलावा दूसरी टीमों ने जिगनी, चंदौरा, चांदीपाटी, बीरा आदि खदानों की घेराबंदी की।

चंदौरा खदान से चार पोकलैंड, चांदीपीट से तीन, बीरा से चार पोकलैंड और एक जेसीबी जब्त की है। चार लिफ्टर मशीनों में तीन चंदौरा और एक चांदीपाटी खदान से पकड़ी गई है। खदानों में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है। बालू माफियाओं में हड़कंप और खलबली है। एमपी के खनिज अधिकारियों ने रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। 
 

चेकिंग और चालान की रस्म अदायगी

एमपी पुलिस द्वारा केन नदी की खदानों से पकड़ी गईं पोकलैंड व जेसीबी।
दूसरी तरफ यूपी क्षेत्र वाले बुंदेलखंड में योगी सरकार फिलहाल ऐसा कोई सख्त कदम उठाती नजर नहीं आ रही। दो दिन पूर्व एमपी की सीमा से जुड़े नरैनी क्षेत्र में स्थानीय भाजपा विधायक इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल का होने की परवाह किए बगैर धरने पर बैठ गए थे। उसी के बाद नसेनी (नरैनी) घाट में केन नदी पर बने पुल को तोड़ने की खानापूरी कर ली गई। लेकिन ई-टेंडर से हाल ही में चालू हुई बांदा जिले की कई खदानों में धड़ल्ले से पोकलैंड और जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है।

लमेहटा, कुल्लूखेड़ा, हटेटी पुरवा-1, खप्टिहा आदि में खनन का काम चालू हो गया है। उधर, एमपी से भी बालू के सैकड़ों ट्रक रोजाना शहर से गुजर रहे हैं। इक्का-दुक्का की चेकिंग और चालान की रस्म अदायगी की जा रही है। 
 
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केन को बचाने के लिए पन्ना में धरना शुरू

केन नदी को अवैध खनन से बचाने के लिए पन्ना (एमपी) में कलेक्ट्रेट के पास बेमियादी अनशन पर बैठे बांदा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य
बांदा में केन नदी का अस्तित्व बचाने के लिए पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में आंदोलन शुरू हो गए हैं। भारी भरकम मशीनों से रात दिन हो रहे अवैध खनन के विरुद्ध पन्ना जिला मुख्यालय में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब कलेक्ट्रेट के पास अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया गया है। 
आंदोलन और धरने की अगुवाई कर रहे बांदा जिला पंचायत के पूर्व सदस्य और मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग युवा संघ प्रदेश उपाध्यक्ष महेंद्र पाल वर्मा के साथ कई समर्थक और स्वयंसेवी धरने में शामिल हुए। उनकी मुख्य मांग अवैध खनन की सीबीआई जांच और दोषी अधिकारियों व माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की है।
  आरोप लगाया है कि सत्ताधारी जनप्रतिनिधि भी केन नदी को बर्बाद करने में शामिल हैं। केन से करोड़ों रुपये की बालू निकालकर एक तरफ जहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजस्व को भी चूना लगाया जा रहा है। 
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