मुसीबतें हमारी जिंदगी की एक सच्चाई हैं। कोई इस बात को समझ लेता है तो कोई पूरी जिंदगी इसका रोना होता है। जिंदगी के हर मोड़ पर हमारा सामना मुसीबतों से होता है। इसके बिना जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती। अक्सर हमारे सामने मुसीबतें आती हैं तो हम उनके सामने पस्त हो जाते हैं। उस समय हमें कुछ समझ नहीं आता की क्या सही है और क्या गलत।
कानपुर शहर के जाने-माने मोटिवेशनल स्पीकर दीप अरोड़ा ने समर कैंप के दौरान ये महत्वपूर्ण बातें कहीं। कौशलपुरी स्थित सनातन धर्म शिशु मंदिर में समर कैंप में दीप ने पर्सनैलिटी डेवलपमेन्ट के बारे में जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि 5 चीजें पर्सनैलिटी के लिए बहुत जरूरी हैं।
विज्ञापन
2 of 6
मोटिवेशनल स्पीकर दीप अरोड़ा पर्सनैलिटी डेवलपमेन्ट के बारे में बताते हुए
दीप अरोड़ा ने कहा कि जब हम किसी से मिलते हैं तो मन में उस व्यक्ति की एक इमेज बना लेते हैं। ये इमेज पॉसिटिव, निगेटिव या नेचुरल हो सकती है। पर अगर हम अपनी पर्सनैलिटी ग्रूमिंग करना चाहते हैं तो हमें इस इमेज को इन्टेंशनली पॉसिटिव बनाना होगा। हमें अपने माइंड को ट्रेंड करना होगा कि वो लोगों में अच्छाई खोजे बुराई नहीं। ये करना इतना मुश्किल नहीं है, अगर आप माइंड को अच्छाई खोजने के लिए निर्देश देंगे तो वो खोज निकालेगा।
विज्ञापन
3 of 6
मोटिवेशनल स्पीकर दीप अरोड़ा
मुस्कराना जाहिर करता है कि आप सामने वाले को पसंद करते हैं। यही बात हर तरह की रिलेशन में लागू होती है; इसलिए आप जब भी किसी से मिलें ( of course कुछ exceptions हैं ) तो चहरे पर एक सामान्य सी खुशी लाइये, इससे लोग आपको पसंद करेंगे, आपसे मिलकर खुश होंगे। आपकी मुस्कराहट के जवाब में मुस्कराहट न मिले ऐसा कम ही होगा, और होता भी है तो लेट इट बी आपको अपना पार्ट अच्छे से प्ले करना है बस।
4 of 6
मोटिवेशनल सेमिनार में मौजूद बच्चे
बोलने से पहले सुनना जरूरी है। इसे आप पॉइंट फोर का एक्सटेंशन कह सकते हैं। जब आप दूसरे में इंट्रेस्ट लेते हैं तो इसमें ईमानदारी होनी चाहिए. आपने “आप क्या पसंद करते हैं?” इसलिए नहीं पूछा कि बस वो जल्दी से अपना जवाब ख़तम करे और आप अपनी राम-कथा सुनाने लग जाएं। आपको सामने वाले को सिर्फ पहले बोलने का मौका ही नहीं देना है, बल्कि उसकी बात को ध्यान से सुनना भी है और बीच-बीच में उससे रिलेटेड और भी बातें करनी हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई कहता है कि उसे घूमने का शौक है, तो आप उससे पूछ सकते हैं कि उसकी फेवरेट टूरिस्ट डेस्टिनेशन क्या है और वहां पर कौन-कौन सी जगह अच्छी हैं।
विज्ञापन
5 of 6
मोटिवेशनल स्पीकर दीप अरोड़ा पर्सनैलिटी डेवलपमेन्ट के बारे में बताते हुए
क्या कहते हैं से भी ज्यादा जरूरी है कि कैसे कहते हैं। आप जो बोलते हैं उससे भी अधिक महत्त्व रखता है कि आप कैसे बोलते हैं। उदाहरण के लिए आपसे कोई गलती हुई और आप मुंह बना कर सॉरी बोलते हैं तो उस सॉरी का कोई मतलब नहीं। हमें न सिर्फ सही शब्दों का इस्तेमाल करना है बल्कि उन्हें किस तरह से कहा जा रहा है इस बात का भी ध्यान रखना है। इसलिए आप अपनी टोन और बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दीजिये, जितना हो सके विनम्र और सही तरीके से लोगों से बात करिए।
पर्सनैलिटी डेवलपमेन्ट एक ऑन गोइंड प्रॉसेस यानी कि एक लगातार किया जाने वाला सामान्य व्यवहार है। हम सब में सुधार की असीमित संभावनाएं हैं। इसलिए कभी ये मत समझिये कि बस अब जिंतना इम्प्रूवमेन्ट होना था हो गया, बल्कि अपने लिए कुछ समय निकाल कर अपनी एक्टिविटिज, अपने शब्दों को बारीकी से निरीक्षण करिए। आपने क्या किया, आप उसे और अच्छा कैसे कर सकते हैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि आप किसी चीज को लेकर खुद को तीस-मारखां समझ रहे हैं और हकीकत में लोग आपकी इस बात को पसंद नहीं करते। उदाहरण के लिए- कुछ साल पहले मैंने ये महसूस किया कि लोगों में जल्दी सुधार लाने के चक्कर में मैं इतने अधिक गल्तियां निकाल कर रख देता कि उनका कॉन्फिडेंस ही कम हो जाता। इस लिए बिंदु पर सुधार जरूरी है और अब मैं धैर्यतापूर्वता ये काम करता हूँ। आप भी इस रास्ते पर बढ़ते हुए खुद को ऑब्जर्व करते चलिए और लगातार सुधार करते जाइये।