कानपुर में कलक्टरगंज पुलिस ने जिस हत्याकांड को दो साल पहले दफना दिया था, उसका खुलासा बुधवार को हुआ। मृतक की मां की बदौलत मुख्य आरोपी को न केवल जेल भेजा गया बल्कि सभी पांचों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट भी दर्ज हुई।
कुलीबाजार निवासी 23 वर्षीय युवक का शव सीपीसी माल गोदाम कलक्टरगंज में 15 अगस्त 2018 को मिला था। शिनाख्त न करवा पाने पर पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव का लावारिस में अंतिम संस्कार करा दिया था।
हैरानी की बात यह थी कि पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि होने के बाद भी पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट नहीं दर्ज की। भले ही अज्ञात में करती। इधर कुलीबाजार निवासी नसीम बेगम 13 अगस्त 2018 से लापता बेटे जुबैर की तलाश में जुटी थीं।
21 अगस्त को अनवरगंज थाने में उन्होंने गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी। फरवरी 2020 में उन्होंने कलक्टरगंज पुलिस से संपर्क किया। उम्र और हुलिया बताने के बाद कलक्टरगंज पुलिस ने शव के कपड़े उन्हें दिखाए तो उन्होंने पहचान कर ली।
इसके बाद भी पुलिस ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसी बीच जुबैर के एक दोस्त ने नसीम बेगम को अहम जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने डिप्टी पड़ाव निवासी रसीद को बुधवार को गिरफ्तार किया। तब उसने पूछताछ में कबूल किया कि उसने दोस्त वसर, अफरोज, नियाज खान व एक अन्य के साथ मिलकर जुबैर की गला दबाकर हत्या कर दी थी।
विवाद जुए के पैसे के लेनदेन और नशेबाजी को लेकर हुआ था। बताया कि जुबैर उससे पैसों की मांग करता था। एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि रसीद को बुधवार को जेल भेज दिया गया। उसके तीन साथी एनडीपीएस में पहले से ही जेल में हैं। फरार एक साथी की तलाश की जा रही है।
सैंपल भी सही नहीं ले सकी पुलिस, जांच शुरू
नसीम बेगम ने जब कलक्टरगंज पुलिस से संपर्क कर लावारिस शव जुबैर का होने का दावा किया था, तब पुलिस ने डीएनए जांच के लिए भेजा था। एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि लैब ने सैंपल रिजेक्ट कर दिया था। दरअसल शव का सैंपल मानक के अनुसार नहीं लिया गया था। इसके अलावा हत्या की रिपोर्ट न दर्ज करने समेत अन्य गड़बड़ियों में तत्कालीन कलक्टरगंज इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज के खिलाफ जांच शुरू हो गई। सीओ कलक्टरगंज श्वेता यादव जांच कर रही हैं। एसपी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।