औरैया में चार साल पहले दहेज के लिए बहू को मौत की नींद सुलाने के मुकदमे में वादी व गवाहों के मुकरने के बावजूद पति और सास-ससुर को उम्रकैद की सजा मिली। बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिवकुमार की कोर्ट ने बचाव पक्ष की लूटपाट के दौरान बदमाशों द्वारा हत्या किए जाने की दलील को असत्य करार देकर तीनों अभियुक्तों को हत्या का दोषी माना।
कोर्ट ने तीनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। घटना 30 जुलाई 2015 की है। इसके अगले ही दिन कन्नौज जिले के रता का पुरवा गांव, तिर्वा निवासी सरमन लाल ने औरैया कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिला शासकीय अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा के अनुसार सरमन लाल ने घटना से तीन साल पहले बेटी आरती की शादी भीखमपुर दयालपुर के अरविंद कुमार पुत्र होतीलाल राजपूत के साथ की थी।
दोनों के एक पुत्री अक्षरा (डेढ़ वर्ष) हुई। सरमन लाल का आरोप था कि आरती को पति अरविंद, ससुर होतीलाल और सास लज्जावती दहेज में एक लाख रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे। मांग पूरी न होने पर आरती की हत्या कर शव को वैन से सड़क पर फेंक दिया। पुलिस ने दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना की और आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया।
मुकदमे के दौरान ही आरोपियों व वादी पक्ष में समझौता हो गया। वादी तथा अन्य गवाह घर में लूटपाट के दौरान अज्ञात बदमाश द्वारा आरती की गला दबाकर हत्या करने की गवाही देकर दहेज हत्या, प्रताड़ना के आरोप से मुकर गए। डीजीसी अभिषेक मिश्रा ने आरोपियों के विरुद्ध कठोर दंड की बहस की। बचाव पक्ष ने वादी पक्ष के गवाहों के अनुसार सभी आरोपियों को निर्दोष बताया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने वादी पक्ष की गवाही को लेकर दहेज हत्या व प्रताड़ना से सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, लेकिन बचाव पक्ष की घर में लूटपाट व बदमाशों द्वारा गला दबाकर हत्या की कहानी को भी असत्य माना। इसी आधार पर पति अरविंद कुमार, ससुर होतीलाल, सास लज्जावती को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर छह-छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। तीनों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।