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Kanpur News: हैलट के बर्न वार्ड की दीवारों पर काई जमी

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कानपुर। हैलट का बर्न वार्ड चालू न हो पाने से 17 जिलों के बर्न रोगियों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसे चालू करने की कवायद साल भर से चल रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को पांच बार नोटिस दे चुका है। प्रमुख सचिव और डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह भी निरीक्षण कर निर्देश चुके हैं लेकिन हालात जस के तस हैं। प्राचार्य डाॅ. काला ने हाल की वीडियो क्लिप बनाकर प्रमुख सचिव को भेजी है।
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बर्न वार्ड का भवन बने एक साल हो गया है। इसकी खिड़कियों, फर्श आदि पर थोड़ा सा काम बाकी है जिसकी वजह से इसे हैंड ओवर नहीं किया गया। रोगियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। तत्कालीन प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को निर्माण निगम ने सूचित किया कि काम पूरा हो गया है। उस पर प्राचार्य डॉ. काला ने अधूरे काम की वीडियो भेज हालात बताए हैं। बर्न वार्ड चालू न हो पाने से प्लास्टिक सर्जरी विभाग अटका हुआ है। इसके अलावा त्वचा बैंक भी नहीं बन पाया। त्वचा बैंक बनने से बर्न रोगियों को बहुत राहत मिलेगी।

बर्न वार्ड में आईसीयू के अलावा महिला और पुरुष वार्ड की अलग-अलग व्यवस्था है। इसके साथ ही प्लास्टिक सर्जरी की ओटी भी रहेगी। गंभीर रोगियों के लिए आईसीयू भी रहेगा। सर्जरी विभाग में इस समय दो प्लास्टिक सर्जन हैं लेकिन उनका लाभ बर्न रोगियों को नहीं मिल पा रहा है। रोगियों को हैलट से उर्सला रेफर किया जाता है। उर्सला का बर्न वार्ड फुल होने पर रोगी को लखनऊ के हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
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रोगियों को कॉरपोरेट हॉस्पिटल जैसी सुविधाएं देने के लिए बना वार्ड फिफ्टी तैयार है लेकिन साल भर से यहां स्टाफ के लिए कवायद चल रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन प्रस्ताव भेज चुका है। इसके साथ शासन की हर महीने होने वाली बैठकों में भी इस पर चर्चा होती है। प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि स्टाफ मिले तो व्यवस्था बनाकर इसे चालू किया जा सकता है।


हैलट का ई हॉस्पिटल चालू नहीं हो पाया है। इस वजह से रोगियों को ऑन लाइन रिपोर्ट नहीं मिल पा रही। ई-हॉस्पिटल को लेकर हर महीने बैठक में समीक्षा होती है। इसके अलावा शासन से चालू करने के दिशा निर्देश आते है। शासन ने साल में आठ बार इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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