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डी-2 गैंग का शार्प शूटर था मोनू पहाड़ी, प्रेमिका को दिनदहाड़े मारी थीं सात गोलियां

Fri, 03 Apr 2020 05:06 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मोनू पहाड़ी की फाइल फोटो - फोटो : गूगल
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कानपुर में हिस्ट्रीशीटर और डी-2 गैंग का शार्प शूटर रहा मोनू पहाड़ी उर्फ राशिद पहाड़ी ने बेवफाई करने पर अपनी प्रेमिका को दिनदहाड़े बीच सड़क पर मौत के घाट उतार दिया था। मोनू ने जूही ढाल के पास प्रेमिका को सात गोलियां मारी थीं। इस वारदात के बाद पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी।
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मोनू पर हत्या, लूट, हत्या का प्रयास, रंगदारी, अपहरण आदि के 16 केस दर्ज थे। उसकी मौत से शहर में अपराध के एक बड़े अध्याय का अंत हुआ है। एक पुलिस अफसर के मुताबिक नेहा नाम की युवती से मोनू का प्रेम प्रसंग था। ताबड़तोड़ कई वारदातों को अंजाम देने पर मोनू जेल गया।

जेल में उसे पता चला कि उसकी प्रेमिका से उसके एक करीबी के संबंध हो गए। इस बीच जब वह पेशी पर आया तो पुलिस हिरासत से भाग गया। जूही ढाल के पास दिनदहाड़े उसने नेहा को एक के बाद एक सात गोलियां मारीं। तीन गोलियां उसके चेहरे व चार गोलियां नाजुक अंगों पर मारीं। इसमें रईस बनारसी का भी नाम आया था।
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वर्चस्व में की थीं हत्याएं
मोनू पहाड़ी 16 साल की उम्र में पहली बार एक मकान के विवाद में आरोपी बना। एक पुलिस अफसर के मुताबिक इसमें वह बाल सुधार गृह भेजा गया था। जब वह यहां से निकला तो कुख्यात अपराधी इसरार पागल के साथ शामिल हो गया। हालांकि कुछ समय बाद ही इसरार शहर छोड़कर चला गया।

तब मोनू डी-2 गैंग में शामिल हुआ। पहले अतीक गैंग और फिर रईस बनारसी के गैंग में शामिल होकर वारदातों को अंजाम देने लगा। उसने सबसे पहले डी-2 गैंग से सुपारी लेकर शातिर अपराधी लाला हड्डी व चौरसिया की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की। फिर मूलगंज में हसीन टुंडा को मौत के घाट उतारा। मोनू गैंग के लिए रंगदारी वसूलता था। इसमें वह चमड़ा, बारदाना कारोबारियों को निशाना बनाता था। उस पर मोनू पर पचास हजार का इनाम भी था।

एसटीएफ पर किया था हमला
एसटीएफ ने 19 अगस्त 2014 को मोनू पहाड़ी की नौबस्ता के ब्रह्देव मंदिर के पास घेराबंदी की। जब एसटीएफ के अधिकारियों ने सरेंडर करने को कहा तो उसने उन पर हमला कर दिया। बाइक से भागते समय अचानक फिसलकर गिर गया। तब एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया था। 2016 में उसको सात साल की सजा सुनाई गई थी।
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