कानपुर। इस बार मानसून पिछड़ने के संकेत मिलने लगे हैं। आकलन किया जा रहा है कि मानसून निश्चित समय 20 जून से एक सप्ताह देर से आ सकता है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के मौसम विभाग में उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो 56 साल में सिर्फ दो बार मानसून समय पर कानपुर परिक्षेत्र आया है। इसके अलावा मानसूनी बारिश आगे-पीछे हुई है। मानसून सबसे अधिक वर्ष 2002 में 31 जुलाई को यहां पहुंचा था तब यह 41 दिन देरी से आया था।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दो बार वर्ष 2016 और वर्ष 2025 में मानसून समय से 20 जून को यहां पहुंच पाया। अन्य वर्षों में इसकी स्थिति निश्चित समय से आगे-पीछे रही है। 56 साल में मानसून सबसे अधिक एक बार लेट हुआ। वर्ष 2002 में 41 दिन देर से आया। उसके पहले वर्ष 2022 में एक महीने लेट हुआ था। मानसून 20 जुलाई को कानपुर परिक्षेत्र पहुंच पाया।
इसके अलावा मानसून समय के पहले भी यहां आया है। 56 साल में सबसे जल्दी वर्ष 1975 में तीन जून को यहां पहुंचा था। छह जून को वर्ष 2001 में यहां आया। कुल मिलाकर अभी तक 11 बार मानसून 20 जून के पहले यहां पहुंचा। 15 बार जुलाई के महीने में कानपुर परिक्षेत्र पहुंच पाया।
मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी ने बताया कि स्थिति ऐसी ही रही तो इस बार मानसून के यहां 28 जून तक पहुंचने की संभावना है।