कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पीएफ निकालने के नियमों में परिवर्तन किया है। अब नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी नियोक्ता की ओर से जमा किया गया अंशदान और पेंशन में जमा अंशदान नहीं निकाल सकेंगे। जानकारों के मुताबिक पेंशनरों की संख्या बढ़ाने और उन्हें ज्यादा से ज्यादा सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था की गई है। शहर में 50 हजार पीएफ पेंशनर हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के दायरे में आने वाला नियोक्ता हर महीने 12 फीसदी अंशदान कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करता है। 12 फीसदी हिस्सेदारी कर्मचारी की भी होती है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक देखने में आया था कि कर्मचारी एक संस्थान में नौकरी छोड़ने के बाद दो महीने के वेटिंग पीरियड के बाद पीएफ का पूरा पैसा निकाल लेता है या नई नौकरी मिलने पर ट्रांसफर का आवेदन करता है। पैसा निकालने वालों की संख्या ज्यादा होती है। इसे रोकने के तहत ही नई व्यवस्था की गई है। अब कर्मचारी 58 साल की उम्र होने से पहले नियोक्ता का अंशदान नहीं निकाल सकेगा। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।
इंप्लाइज प्रॉविडेंट फंड स्टाफ यूनियन यूपी रीजन के महामंत्री राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि मौजूदा समय में कर्मचारी जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं फिर पीएफ का पैसा निकालने के लिए आवेदन करते हैं। इस व्यवस्था पर सख्ती करने और भविष्य में कर्मचारी के पास पीएफ का ज्यादा पैसा हो इसको देखते हुए नई व्यवस्था की गई है। इसका सबसे ज्यादा लाभ यह होगा कि आने वाले समय में पेंशनर बढ़ेंगे। साथ ही साथ उनकी सामाजिक सुरक्षा बढ़ेगी।