यूपी विधानसभा चुनाव के ख़ास प्रावधानों का अभी से मखौल बनना शुरू हो गया है। इसकी बड़ी वजह सुस्त पड़े सरकारी महकमें हैं। दरअसल, इन अफसरों की काम न करने की निहायती बुरी आदत बन चुकी है। वहीं ऊंचे पदों पर विराजमान गणमान्य भी इनसे ब्योरा लेने में कोई कड़ाई नहीं बरत रहे।
फुल ढील दी गई है, इसलिए राज्य चुनाव के मद्देनजर बनाए गए प्रावधानों का खूब मजाक उड़ाया जा रहा है। इस रिपोर्ट में अमर उजाला आपको बता रहा है कि नियम बनने के बावजूद कहां कमियां रही हैं।
नामांकन के बाद से प्रत्याशियों के खाते में खर्च जोड़ने के आदेश पर होना था अमल
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चुनाव आयोग के नामांकन के बाद ही प्रत्याशियों के खाते में खर्च जोड़ने के आदेश पर अमल नहीं हुआ। ज्यादातर रिटर्निंग ऑफीसर ने एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल को प्रत्याशियों की जानकारी नहीं दी है। इसलिए प्रत्याशियों के खर्च का रजिस्टर नामांकन शुरू होने के चार दिन बाद भी नहीं बन सका।
कानपुर के एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल के नोडल अफसर/मुख्य कोषाधिकारी शिव सिंह का कहना है कि वह पूरे मामले से जिला निर्वाचन अधिकारी कौशल राज शर्मा को अवगत करा रहे हैं। एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल में हर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों के खर्च का ब्योरा तैयार करने के लिए एक टीम बनाई गई थी।
आयोग की वेबसाइट पर भी होगी ऑनलाइन फीडिंग
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इस तरह दस विधानसभा क्षेत्र में दस टीम को प्रत्याशियों के खर्च का ब्योरा तैयार करना है। टीम को हर प्रत्याशी का खर्च का अलग रजिस्टर बनाना है। यह खर्च ऑन लाइन करने के लिए आयोग की वेबसाइट पर फीडिंग भी होगी। 24 जनवरी से नामांकन शुरू हुआ था। अभी तक 27 नामांकन हो चुके हैं।
इसमें ज्यादातर प्रत्याशी राजनैतिक दलों के हैं। एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल को नामांकन के दिन से ही प्रत्याशियों के जुलूस के खर्च को शामिल करते हुए ब्योरा तैयार करना था लेकिन आरओ से प्रत्याशियों की सूची न मिलने से यह काम शुरू तक नहीं हो सका है।
अभी तक नामांकन जूलूस की गई वीडियोग्राफी भी काफी खराब है। ज्यादातर में वीडियोग्राफर ने गाड़ी की नंबर प्लेट का ही वीडियो बना लिया है। इससे यह तक स्पष्ट नहीं हो रहा है कि जुलूस में शामिल गाड़ी कौन सी है। आरओ से जूलस, सभाओं और परमीशन का ब्योरा न मिलने से पूरी तरह वीडियोग्राफी नहीं हो पा रही है।
वीआईपी लंच 250 रुपये में, गुलाब की माला 100 की
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एक्सपेंडीचर (खर्च) मॉनीटरिंग सेल ने चुनाव खर्च की संशोधित सूची जारी कर दी है। इस सूची के हिसाब से वीआईपी लंच का रेट 250 रुपये और बड़ी गुलाब की माला 100 रुपये की है।
प्रत्याशियों का चुनाव खर्च तय करने के लिए एक्सपेंडीचर मानीटरिंग सेल ने नामांकन से काफी पहले सूची जारी की थी। इस पर कुछ राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई थी। जिलाधिकारी ने राजनीतिक दलों से रेट तय कर सूची देने को कहा था।
मानीटरिंग सेल के नोडल अफसर/मुख्य कोषाधिकारी शिव सिंह ने बताया कि कुछ मदों में सुझाए गए थे। इसके बाद बाजार से सर्वे कराया गया था। इस आधार पर संशोधित लिस्ट जारी कर दी गई है। अब इसी रेट के आधार पर प्रत्याशियों के खर्च जोड़े जाएंगे।
ये हैं नए रेट (रुपये में)
हल्का नाश्ता पूड़ी-सब्जी पैकेट : 30
एक लीटर पानी की बोतल : 15
जलपान : 20
25 लीटर वॉटर कैन : 30
सामान्य भोजन थाली : 150
वीआईपी लंच पैक : 250
गुलाब फूल बड़ा माला : 100
गुलाब फूल छोटा माला : 50
गेंदा फूल बड़ा माला : 20
टेंपो-ट्रैक्टर किराया : 350 और फ्यूल
थ्री व्हीलर किराया : 400 और फ्यूल
मैजिक : 800
ड्राइवर का पारिश्रमिक प्रतिदिन : 350
बस 41 से 45 सीटर : 1100 और फ्यूल
बस 46 सीट से ज्यादा : 1200 और फ्यूल
जीप, सूमो, मार्शल : 800 और फ्यूल
क्वालिस, स्कार्पियो, सफारी : 1200 और फ्यूल
प्रचार के लिए सीडी निर्माण लागत : 1100 प्रति सीडी
लाउडस्पीकर प्रतिदिन : 500
माइक्रोफोन प्रतिदिन : 500
वीआईपी कुर्सी : 30, सोफा : 300
प्लास्टिक कुर्सी : 06, डीलक्स कुर्सी : 09
झंडी प्लास्टिक प्रतिहजार : 500
कपड़े का बैनर : 150
लकड़ी के फ्रेम पर फ्लैक्स : 15 रुपये प्रति वर्ग फीट
गेट निर्माण : 2000, पंडाल 15 बाई 15 स्क्वायर फीट : 10 रुपये।