जिला जेल में मंगलवार दोपहर अचानक सायरन बज उठा। सायरन के चंद सेकेंड के बाद ही घंटा भी बजने लगा। दोनों की आवाज पर जेलर राजेश पांडेय और अन्य स्टाफ सतर्क हो गए। जेल परिसर की तलाशी कराई गई। कैदियों को बाहर निकलवाकर गिनती हुई। यह सायरन किसी घटना से नहीं बल्कि मॉकड्रिल थी। इसमें जेल के अंदर और बाहर की चौकसी परखी गई।
जिला जेल में हुई मॉकड्रिल
- फोटो : अमर उजाला
जेल की दीवारों पर लगे मॉनीटरिंग सिस्टम, फायर फाइटिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों को देखा गया। परिसर के चोर रास्तों की जांच कराई गई। जेल राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि मॉकड्रिल में सभी तरह की सुरक्षा व्यवस्था परखी जाती है। स्टाफ को घरों से बुलाया गया।
जिला जेल में हुई मॉकड्रिल
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संवेदनशील जगहों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे
जेल की संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी कैमरे और कुछ दीवारों पर कंटीले तार लगाए जा रहे हैं। यह व्यवस्था पिछले साल असम के कैदी असरुद्दीन के जेल की दीवार फांद कर भागने की घटना के बाद से हुई है। जेल के बैरकों और खाली जगहों पर मॉनीटरिंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं।