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इस जेल में कैदियों के पास कहां से आ जाता है मोबाइल

Sun, 09 Apr 2017 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद

सार

जेलर ने दर्ज कराया दोष सिद्घ बंदियों के खिलाफ मुकदमा
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विस्तार
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सेंट्रल जेल फतेहगढ़ में दो बंदियों के कब्जे से मोबाइल बरामद होने से जेल प्रशासन एक बार फिर सकते में आ गया है। आंतरिक जांच के नाम पर कई दिनों तक मामले को छुपाए रहे जेल प्रशासन ने शनिवार को दोनों बंदियों के खिलाफ अनुशासनहीनता और नियम विरुद्घ मोबाइल, सिम व चार्जर रखने का मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
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कोतवाली फतेहगढ़ में दर्ज कराए गए मुकदमे में जेलर सुनील कुमार ने कहा है कि दोष सिद्घ बंदी श्रवण कुमार पुत्र शिवस्वरूप निवासी रानीदामर थाना सिकंदरपुर जिला कासगंज की अर्जी पर उसे वरिष्ठ अधीक्षक के समक्ष शनिवार की सुबह 10 बजे पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था। इस दौरान उसने मौका पाकर दीवार में अपना सिर मार दिया, जिससे खून बहने लगा। इस पर उसे जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

जेलर के अनुसार 1 अप्रैल को श्रवण कुमार के पास जेल कर्मियों को मोबाइल होने का शक हुआ था। तब उन्होंने उसकी तलाशी लेने का प्रयास किया तो बंदी ने तलाशी देने से मना कर दिया। वह कर्मचारियों से अनुशासनहीनता व छीना-झपटी करने लगा था। बाद में हुई तलाशी में उसके पास से मोबाइल तथा डोकोमो का सिम 8991045111 व एक चार्जर बरामद हुआ था।
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इसके अलावा 3 अप्रैल 2017 को दोष सिद्घ बंदी सौरभ पुत्र महेश निवासी ब्रह्मपुरी एटा के पास से भी मोबाइल बरामद हुआ था। जेलर ने दर्ज कराई गई। रिपोर्ट में कहा है कि यह दोनों बंदी उदंड किस्म के हैं। अनुशासनहीनता तथा अन्य गतिविधियां इनमें व्याप्त हैं। दोनों ही हत्या में आजीवन कारावासी हैं। पुलिस ने दोनों कैदियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मालूूम हो कि इससे पहले भी केंद्रीय कारागार में डस्टबिन में मोबाइल बरामद हो चुके हैं।

मामले को दबाए रहा जेल प्रशासन
कैदियों के पास से मोबाइल मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई करने के बजाय जेल प्रशासन मामले को दबाए रहा। शनिवार को जब कैदी ने दीवार में सिर फोड़ा तब जेल प्रशासन हरकत में आया। उधर जेल अधीक्षक वीपी त्रिपाठी का कहना है कि कैदियों के पास से मोबाइल मिलने के बाद जांच हो रही थी कि मोबाइल पहुंचने के लिए कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं। जांच अभी चल रही है। इसीलिए मोबाइल मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई नहीं की गई थी।

जैमर लगाने का निर्णय शासन को लेना है
जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु का कहना है कि जेल के अंदर जैमर लगाने का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है। वर्ष 2016 में डीजे, एसपी के साथ संयुक्त निरीक्षण के दौरान जेल के अंदर जैमर लगाने की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए गए थे। इस मुद्दे पर लिखापढ़ी चल रही है।

जांच जारी, अब तक कार्रवाई जीरो
फरवरी महीने में जेल के अंदर डीएम, एसपी को निरीक्षण के दौरान कई मोबाइल व चार्जर और ईयरफोन बरामद हुए थे। तब मुकदमा दर्ज होने के बाद कानूनी कार्रवाई की गई थी। इस मामले की जांच कन्नौज की जिला जेल के अधीक्षक को सौंपी गई थी। इस मामले की जांच अभी चल रही है। कार्रवाई के नाम पर नतीजा जीरो है।
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