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मोबाइल की लत बना रही मानसिक रोगी, चाहते हैं अपने बच्चों की सलामती तो इन बातों का ध्यान दें

Wed, 24 Jul 2019 07:53 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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कन्नौज में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला चिकित्सालयों में मन-कक्ष स्थापित करने के लिए पत्र जारी किया है। पत्र में आत्महत्या की रोकथाम, मोबाइल नशा मुक्ति सहित नवीन मनोविकारों की रोकथाम हेतु सेवाएं (परामर्श एवं आवश्यकतानुसार औषधियां) उपलब्ध कराने के निर्देश जिलाधिकारी/अध्यक्ष, जिला स्वास्थ्य समिति व मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को दिए हैं। 
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स्वास्थ्य निदेशक मधु सक्सेना ने पत्र जारी कर कहा है कि मोबाइल का ज्यादा प्रयोग करते-करते युवा, वयस्क सहित प्रत्येक आयु वर्ग में नए रोग ने जन्म ले लिया है। मोबाइल के प्रयोग से लोगों की आंखें शुष्क हो रही हैं। बच्चों से मोबाइल लेने पर वह आक्रामक हो जाते हैं। परीक्षाओं में कम अंक लाने, अनुत्तीर्ण होने, मोबाइल गेम्स खेलने व अन्य कारणों से लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

अधिकतर प्रकरणों को काउंसलिंग व आवश्यकतानुसार औषधियों से प्रथम चरण में ही उपचारित किया जा सकता है। इससे कई जीवन बचाए जा सकते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर कृष्ण स्वरूप ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशक के पत्र को संज्ञान में लेते हुए बच्चों को मोबाइल नशा मुक्ति हेतु जिला चिकित्सालय में स्थापित मन कक्ष में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत ‘मोबाइल नशा मुक्ति’ एवं ‘आत्महत्या रोकथाम’ हेतु नि:शुल्क परामर्श दिया जाएगा। 
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राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. राममोहन तिवारी ने बताया कि जिला चिकित्सालय में मानसिक बीमारियों के लिए मन कक्ष पहले से स्थापित है। यहां सभी को नि:शुल्क इलाज एवं परामर्श दिया जाएगा। बताया कि यह नशा शराब और ड्रग्स से बढ़कर है। इसकी वजह से बच्चों में नींद न आने, भूख की कमी, दिमाग पर बुरा असर और आंखें खराब होने की समस्याएं होने लगती हैं।

मोबाइल फोन से आसानी तो मुश्किलें भी 
मोबाइल फोन ने कई सहूलियतें दी हैं। वहीं मुश्किलें भी हैं। ब्लू व्हेल जैसे खतरनाक गेम अवसाद में ले जाकर आत्महत्या के कगार पर छोड़ जाते हैं। सोशल मीडिया लत बन गई है।  
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