कानपुर देहात। मनरेगा के सभी सक्रिय मजदूरों की ई-केवाईसी कराई जाएगी। यह प्रक्रिया सरकारी पेंशनरों की तरह ही शुरू की गई है। इसका उद्देश्य फर्जीवाड़े और प्रॉक्सी श्रमिकों पर लगाम लगाना है।
जिले में एक लाख 97 हजार 941 मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें 93 हजार 781 सक्रिय मनरेगा मजदूर हैं। इनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। मनेरगा जॉब कार्ड धारक सभी सक्रिय मजूदरों को ई-केवाईसी के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) और आधार फेस प्रमाणीकरण एप का प्रयोग करना होगा। ऐसे मजदूर जिन्होंने अभी तक अपनी ई-केवाईसी नहीं कराई है, उन्हें जल्द यह प्रक्रिया पूरा करना होगा। संबंधित ग्राम पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक को जिम्मेदारी दी गई है।
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एनएमएमएस एप से होगी निगरानी
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एनएमएमएस एप को विशेष रूप से मनरेगा योजनाओं की निगरानी के लिए विकसित किया है। इस एप के माध्यम से सुपरवाइजर कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं और साथ ही दिनभर के कार्य की तस्वीर भी अपलोड कर सकते हैं। अब इसी प्रणाली में ई-केवाईसी और फेस प्रमाणीकरण को जोड़ने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में इजाफा होगा।
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मजदूरों को मिलेगी सुविधा
कई मजदूरों के पास स्मार्टफोन नहीं होता है। ऐसे में उन्हें समस्या न हो, इसके लिए ग्राम पंचायत कार्यालयों में व्यवस्था की जा रही है, ताकि वे वहीं जाकर अपना फेस प्रमाणीकरण करा सकें। साथ ही अगर जरूरत पड़ती है, तो ब्लॉक स्तर पर कैंप लगाकर तकनीकी सहायकों की मदद से मजदूरों की ई-केवाईसी कराई जाएगी।
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यह होगी प्रक्रिया
ई-केवाईसी के दौरान मजदूरों का आधार आधारित फेस प्रमाणीकरण किया जाएगा। इस प्रक्रिया में केवल फोटो ही नही, बल्कि मजदूर को कैमरे के सामने पलक झपकाने जैसी गतिविधि भी करनी होगी। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्ति जीवित है। यह सत्यापन उसी स्थान पर किया जाएगा जहां मजदूर काम कर रहा होगा। प्रमाणीकरण के बाद मजदूर के जीवित होने का प्रमाणपत्र खुद वेबसाइट पर अपलोड हो जाएगा।
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फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने की कवायद
मनरेगा कार्यों में अब तक कई बार फर्जी उपस्थिति और प्रॉक्सी मजदूरों की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में देखा गया है कि पंजीकृत मजदूर स्वयं काम पर नहीं जाते और उनकी जगह अन्य व्यक्ति कार्य कर लेते हैं। नई ई-केवाईसी प्रणाली के लागू होने के बाद ऐसा संभव नहीं होगा। क्योंकि कार्यस्थल पर ही मजदूर के चेहरे का प्रमाणीकरण किया जाएगा और अगर असली मजदूर नहीं है तो फेस प्रमाणीकरण फेल हो जाएगा। इससे न तो उसकी उपस्थिति लग सकेगी और न ही कार्य दिवस का भुगतान संभव होगा।
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बयान
जिले में जॉब कार्ड पर दर्ज सभी सक्रिय मजदूरों की ई-केवाईसी करना जरूरी है। इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से विकसित नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और आधार फेस प्रमाणीकरण एप का उपयोग किया जाएगा। इससे मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ी रुकेगी। - अशोक कुमार, उपायुक्त, मनरेगा