उन्नाव, कानपुर नगर और कानपुर देहात स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उप चुनाव में सोमवार को पढ़े-लिखों ने खुलकर वोट नहीं डाले। तीन जिलों में कुल 30.44 फीसदी वोटिंग हुई है।
एक्सपर्ट का कहना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तरह सार्वजनिक अवकाश नहीं हुआ, इस कारण वोटर नहीं आ सके।
चुनाव का सही ढंग से प्रचार-प्रसार भी नहीं हुआ। नई मतदाता सूची सही ढंग से अपडेट नहीं की जा सकी। पुरानी मतदाता सूची से तमाम लोगों के नाम गायब मिले हैं।
दूसरी तरफ कुछ मतदान केंद्रों की मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। तमाम मतदाताओं के पास वोट डालने की पर्ची थी लेकिन उनका नाम वोटिंग लिस्ट से गायब था।
पोलिंग एजेंट बनाने को लेकर भी पीठासीन अधिकारी और प्रत्याशियों से तीखी नोकझोंक हुई है। अब 22 जनवरी को मतगणना होगी।
34 साल तक विधान परिषद के सदस्य रहे जगेंद्र स्वरूप के निधन के बाद रिक्त हुई कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव स्नातक क्षेत्र का चुनाव सोमवार को कराया गया।
तीनों जिले के 104 मतदान केंद्रों के 251 बूथों पर वोटिंग को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। डीएम डॉ. रोशन जैकब, एसएसपी शलभ माथुर और उप जिला निर्वाचन अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने तमाम मतदान केंद्रों का दौरा किया।
साथ ही कलेक्ट्रेट में बने कंट्रोल रूम की मदद से मॉक पोल कराया और सुबह 8 बजे से मतदान शुरू करा दिया। पहले दो घंटे का वोटिंग फीसदी बेहद कम रही है।
कानपुर नगर और कानपुर देहात में सिर्फ 3-3 फीसदी ही वोट पड़ सके। उन्नाव में 3.9 फीसदी वोटर घर से निकल पाए। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 के बीच वोटर घरों से निकले जरूर लेकिन चुनाव आयोग के निर्धारित वोटिंग फीसदी का लक्ष्य नहीं भेद सके।
दोपहर 12 बजे तक कानपुर देहात की वोटिंग ही 10 फीसदी का आंकड़ा पार कर सकी। कानपुर देहात में अब तक की वोटिंग के सभी रिकॉर्ड टूट गए हैं। यहां 50.40 फीसदी वोट पड़े हैं।
उन्नाव में 33.22 फीसदी वोटिंग हुई है। कानपुर नगर में चुनाव खत्म होने तक यह आंकड़ा सिमटकर 28 फीसदी रह गया। पिछले चुनाव में करीब 30 फीसदी वोटिंग हुई थी।
अंतिम चार घंटे (दोपहर 12-2 बजे, दोपहर 2 बजे से अपराह्न 4 बजे) के दौरान कानपुर नगर में 20 फीसदी वोट ही पड़ सके।
चुनाव से जुड़े अफसरों का कहना है कि कानपुर नगर में 80 हजार वोटर बढ़े थे, फिर भी वोटिंग फीसदी का कम होना चिंताजनक है। वोटिंग 50 फीसदी के आसपास होनी चाहिए थी।
वहीं, मतदान के बाद 13 प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटियों में बंद हो गए। देरशाम तक 251 पोलिंग पार्टियां राजकीय पालीटेक्निक कानपुर आ गईं। यहां ही स्ट्रांग रूम बनाया गया है, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच मतपेटियां रखी गई हैं।
कानपुर नगर की अपेक्षा कानपुर देहात और उन्नाव का वोटिंग फीसदी उत्साह जनक है। इस बार के चुनाव में भाजपा से अरुण पाठक, निर्दलीय मानवेंद्र स्वरूप और डॉ, विवेक द्विवेदी सहित 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
इन सभी का भाग्य मतपेटियों में कैद हो गए हैं। जब मतपेटी का ताला खुलेगा, तभी पता चलेगा कि कौन बादशाह बना है। यह निर्णय 22 जनवरी को होना है।