कानपुर में एक मेडिकल स्टोर नसों में नशा घोल रहा था। यह मेडिकल स्टोर सिर्फ एक ही इंजेक्शन बेच रहा था। औषधि विभाग के छापे में कैंसर के भीषण दर्द में दिए जाने वाले 300 इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। मेडिकल स्टोर का न लाइसेंस और न ही उस पर फार्मासिस्ट था।
कामदगिरी जैसा पवित्र नाम। दिखावा लोगों को स्वस्थ करने वाली दवाइयों को बेचने का, लेकिन असल धंधा था बहुत गंदा। मसवानपुर में कामदगिरी मेडिकल स्टोर पर औषधि विभाग के छापे में कुछ ऐसा ही खुलासा हुआ है। सोमधार को यहां से 300 से ज्यादा ऐसे इंजेक्शन बरामद हुए, जिन्हें नशे के लिए बेचा जा रहा था।
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खास बात यह है कि यहां सिर्फ इन्हीं की बिक्री होती थी। युवा आते... खिड़की से हाथ डालते और उन्हें पैकेट थमा दिया जाता। पैकेट में इंजेक्शन के साथ निडिल व सिरिज भी होती थी। यानी नशे का पूरा पैकेज। बिना लाइसेंस चल रहे इस मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया है।
विधानसभा उपचुनाव के बाद हुई पहली जनसुनवाई में एक व्यक्ति ने डीएम से इसकी शिकायत की थी। उसने बताया कि मसवानपुर में चल रहे एक मेडिकल स्टोर से नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन खुले आम बेचे जा रहे हैं। आसपास के युवक इसके लती होते जा रहे हैं।
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डीएम ने इस पर औषधि विभाग के निरीक्षक को बुलाकर छापा मारने का निर्देश दिया। टीम के वहां पहुंचते ही इंजेक्शन लेने वाले लोग भाग निकले। मेडिकल स्टोर संचालक भी वहां नहीं मिला। सिर्फ उसका कर्मचारी दीपक सिंह मिला। पता चला कि इसका लाइसेंस भी नहीं है। वहां फार्मासिस्ट भी नहीं था।
बिल भी कर्मचारी नहीं दिखा पाया। टीम ने इंजेक्शन का नमूना लेकर जांच के लिए लखनऊ राजकीय प्रयोगशाला भेजा दिया। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। औषधि निरीक्षक ओमपाल सिंह ने बताया कि बिल नहीं दिखा पाने पर एक अन्य मेडिकल स्टोर पर भी कार्रवाई की गई। वहां भी कोई फार्मासिस्ट नहीं था।
सीधे दिमाग पर करता है असर, एक और इंजेक्शन मिलाकर करते हैं प्रयोग
औषधि निरीक्षक ने बताया कि बिक रहा ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन आमतौर पर कैंसर जैसी बीमारियों में होने वाले भीषण दर्द से छुटकारा पाने के लिए दिया जाता है। यह सीधे दिमाग पर असर करता है। इसके साइड इफेक्ट से बचने के लिए एक अन्य इंजेक्शन फेनिरामाइन मैलेट का प्रयोग भी नशेबाज करते हैं। यह एलर्जी को दूर करने का काम करता है। नशे के लिए इन दोनों इंजेक्शन को एक साथ मिलाकर सिरिंज के जरिए लिया जाता है।
जाली से बंद था मेडिकल स्टोर सिर्फ हाथ डालने की ही थी जगह
कामदगिरी मेडिकल स्टोर को सामने से जाली लगाकर बंद किया गया था। बस थोड़ी सी जगह छोड़ी गई थी। इससे मुट्ठी में पैसा लेकर हाथ अंदर डालते ही अंदर बैठा व्यक्ति इंजेक्शन का पैकेट पकड़ा देता था। पैकेट में इंजेक्शन, सिरिंज और निडिल सब होते थे।
11 नवंबर को भी पाच मेडिकल स्टोरों से बरामद हुई थीं नशीली दवाएं
पिछले महीने चमनगंज में भी निजामी, नूर, एमएसएसआर, शाइन और फैज मेडिकल स्टोर पर छापे मारे गए थे। यहां भी बड़ी संख्या में नशीली दवाएं बरामद की गई थीं। यहां से चार तरह की संदिग्ध औषधियों के नमूने परीक्षण के लिए भरे गए थे। बाकी दवाएं सीज कर दी गई थीं। सीज दवाओं की कुल कीमत करीब 1,45,210 रुपये अंकी गई थी।
कार्रवाई के दिए हैं निर्देश
औषधि विभाग को पूरे जनपद में अभियान चलाकर अवैध तरीके से बेची जा रहीं ऐसी दवाइयों की बिक्री पर रोक लगाने और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।-राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी