रेलवे की उच्च स्तरीय जांच के लिए ट्रेन के कानपुर में खड़ी होने पर उसके कोच सी-1 और सी-2 के गेट पर लगे सीसीटीवी की फुटेज कानपुर सेंट्रल स्टेशन के निदेशक हिमांशु कुमार उपाध्याय, आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त आरएन पांडेय और कॉमर्शियल निरीक्षकों ने देखे। फुटेज के मुताबिक बुजुुर्ग पावर कार के गेट पर पहुंचे तो वहां खड़े एएसआई दलबीर सिंह से बात करते दिखे हैं।
पूछताछ में पता चला कि दलबीर सिंह ने बुजुर्ग से कहा कि उनका कोच पीछे है। फुटेज में दिखा कि इसके बाद बुजुर्ग प्लेटफार्म पर सीमेंटेड बेंच पर जाकर बैठ गए। उनके बैठने के दौरान उनके सामने से ही ट्रेन निकली। इससे यह साफ लग रहा है कि उन्होंने पीछे के कोच में जाने की कोशिश नहीं की या वह बात समझ ही नहीं सके, उन्हें लगा कि कोई दूसरी ट्रेन पीछे से आ रही होगी।
इसे ही रेलवे ने गलती माना कि आरपीएफ के एएसआई को बुजुर्ग यात्री को समझाकर उनके कोच में बैठाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। इसके अलावा रेलवे अधिकारियों ने इटावा के सहायक स्टेशन मास्टर प्रिंसराज यादव और पोर्टर अमृतलाल पर किसी भी कार्रवाई करने से मना किया है। जांच में शामिल इलाहाबाद मंडल के सीनियर डीसीएम नवीन दीक्षित और सीनियर डीएससी अमरेश कुमार ने भी फुटेज देखेे हैं।
फुटेज और इलाहाबाद में बुलाकर संबंधितों से की गई पूछताछ के बाद स्टाफ को क्लीनचिट दे दी गई है। डीआरएम अमिताभ कुमार के मुताबिक इस मामले में इटावा स्टेशन के अधीक्षक को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। डीआरएम के मुताबिक रेलकर्मियों को यात्रियों की वेशभूषा नहीं, बल्कि यह देखना चाहिए कि उसके पास उचित टिकट है या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि हर एक यात्री से रेलकर्मी और अफसर अच्छा व्यवहार करें। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने बताया कि जांच होने पर स्टेशन अधीक्षक निलंबित हुए थे। जांच में उनके खिलाफ कोई बात सामने आई है। दरअसल, चार जुलाई को इटावा स्टेशन पर रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस से बुजुर्ग यात्री रामअवध दास को गाजियाबाद जाना था। उनकी ट्रेन छूटी तो यह आरोप लगा कि उनकी वेशभूषा की वजह से उन्हें ट्रेन में चढ़ने नहीं दिया गया।