गुरु और शनि वक्री हैं। दोनों ही साधना के कारक ग्रह हैं। शिव की साधना में शनि और गुरु का वक्री होना विशेष फलदायी होता है। भविष्य पुराण के अनुसार अगर इस मास में तेल का प्रयोग नहीं करते हैं, तो आयु में वृद्धि होती है।
संतान की वृद्धि होती है। धन वृद्धि और वंश वृद्धि के लिए दूध और दूध से बने पदार्थों का त्याग करना चाहिए। इन सभी पदार्थों को भगवान शिव को अर्पित करें।