कॉर्डियोलॉजी अस्पताल में मरीजों से लूट, बजट में गोलमाल, डॉक्टरों की मनमानी और अराजकता की शिकायत मिलने पर जांच को पहुंचे चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने जांच के नाम पर सैर-सपाटा किया और चले गए।
न बजट के खर्च के बारे में जाना और न ही अराजकता पर कोई सवाल किया। हर गड़बड़ी के सवाल पर सिर्फ एक जवाब, कोई शिकायत करेगा तो जांच कराएंगे। मंत्री के निरीक्षण की जानकारी के बाद कॉर्डियोलॉजी में मची खलबली मंत्री के जाने के बाद जश्न में बदल गई। मंत्री ने भी कॉर्डियोलॉजी की जांच में मीडियाकर्मियों को खूब घुमाया।
दो बार कॉर्डियोलॉजी के सामने से निकले लेकिन निरीक्षण को तब पहुंचे जब मीडियाकर्मी उनकी फ्लीट के साथ लग गए। वार्ड में भर्ती मरीजों ने रट्टू तोते की तरह उनको यहां रामराज बताया। मंत्री ने भी सब कुछ ठीक मान लिया।
शाम करीब 5:05 बजे कार्डियोलॉजी पहुंचे चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री ने पर्चा काउंटर पर मरीजों की संख्या जानी। कार्डियोलॉजी का स्टाफ उस समय सन्न रह गया, जब उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति का रजिस्टर मांग लिया। मैट्रन को रजिस्टर दिखाने को कहा गया लेकिन वह रजिस्टर नहीं लाईं।
कॉर्डियोलॉजी के डॉक्टरों के बहकाने पर मंत्री बिना रजिस्टर देखे ही इमरजेंसी से आईसीयू पहुंच गए। डायरेक्टर ने बता दिया कि अमीर हो या गरीब सभी मरीजों को इमरजेंसी में 24 घंटे फ्री इलाज और दवाएं मिलती हैं। मंत्री ने इसे मान भी लिया।
मंत्री ने मरीजों से बाहर की दवाओं, ड्रेस, वाल्ब, पेसमेकर, स्टंट आदि के खर्च के बारे में जानने की कोशिश तक नहीं की। यह भी नहीं पूछा कि जब बिजली का बिल सरकार दे रही है, जेनरेटर का डीजल सरकार दे रही है तो मरीजों से किस बात के रुपये इन मदों में वसूले जा रहे हैं।
आउटसोर्सिंग के नाम पर सरकार एक करोड़ रुपये कॉर्डियोलॉजी को देती है लेकिन मंत्री ने इस सवाल में कोई रुचि नहीं दिखाई। मीडियाकर्मियों ने डॉक्टरों की अकूत संपत्ति की जानकारी दी तो मंत्री ने कहा कि शिकायत मिलेगी तो जांच कराई जाएगी। रामा मेडिकल कॉलेज का मामला भी मंत्री के सामने उठा तो उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय मिलेगा।