यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, रोक के बावजूद खनन जारी
Thu, 08 Jun 2017 12:08 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
सार
-रोक के बावजूद पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से लमेहटा में हो रहा खदान
- एनओसी और सीमांकन में भी हुआ शर्तों का उल्लंघन
- भोपाल (मप्र) की कंपनी ने पट्टे पर ली है खदान
बांदा में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मशीनों से खनन पर रोक के बावजूद दो दिन पहले यहां बागे नदी की लमेहटा खदान में खनन शुरू हुआ। पहले दिन से ही पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से खनन चालू कर दिया गया है। अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और सीमांकन में भी कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है।
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हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पिछले माह ई-टेंडर से बांदा जनपद की आठ बालू खदानें पट्टे पर दी गई हैं। एनओसी, माइनिंग प्लान आदि की औपचारिकता पूरी करने के बाद अतर्रा तहसील के लमेहटा गांव में बागे नदी की खदान (गाटा संख्या- 1039, रकबा 7.69 एकड़) भोपाल (एमपी) की कंपनी एसोसिएटेड कामर्स को दी गई है। कंपनी ने यह खदान दो करोड़ 50 लाख 82 हजार 720 रुपये में ली है। इस खदान में खनिज विभाग ने मात्र 31,120 घन मीटर खनन योग्य बालू का भंडार बताया है।
दो दिन पूर्व सबसे पहले लमेहटा खदान में खनन शुरू हो गया है। बालू के धंधेबाजों ने सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एनजीटी की परवाह किए बगैर इस खदान में शुरुआत में ही कई पोकलैंड और जेसीबी मशीनें लगा दी हैं। इनसे रात दिन खनन और लोडिंग हो रही है। सैकड़ों ट्रक रोजाना बालू भर रहे हैं।
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पर्यावरण संरक्षण दिवस के दिन ही नदी बांधी
लमेहटा बालू खदान में बागै नदी में बनाया गया पुल का रास्ता।
- फोटो : अमर उजाला
पांच जून को विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस के दिन ही लमेहटा बालू खदान में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने की शुरुआत हुई। नदियों की जलधारा बांधने या प्रभावित करने पर देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा सख्ती से लगाई गई रोक के बावजूद यहां बागे नदी में अवैध रूप से नदी की जलधारा में आरपार पुल बना लिया गया। इस पुल के रास्ते से बालू के ट्रक चित्रकूट जनपद की सीमा में दाखिल होकर गुजरेंगे। जल धारा बांधने से शिद्दत की गर्मी में सिकुड़ रही बागे नदी का पानी शायद प्रवाहित न हो सके। नतीजे में आगे के गांवों के पशुओं और ग्रामीणों को पानी के लाले पढ़ सकते हैं।
एनओसी में अनियमितता की आयुक्त से शिकायत
लमेहटा खदान में अवैध खनन और एनओसी जारी करने में बरती गई अनियमितताओं तथा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन करने की शिकायत जिला सतर्कता निगरानी एवं अनुश्रवण समिति के पूर्व सदस्य अधिवक्ता बृजभूषण सिंह यादव ने मंडलायुक्त और प्रमुख सचिव (खनिज) को पत्र भेजकर की है। कहा है कि लमेहटा खदान मे पर्यावरण एनओसी जारी करने में खनिज विभाग ने नियम कानूनों का उल्लंघन किया है। जिला पंचायत, ग्राम पंचायत आदि को सूचना/नोटिस जारी नहीं की। न ही गांव में इस बाबत मुनादी पिटवाई अथवा कोई इश्तहार लगवाया। जबकि एनजीटी और हाईकोर्ट के यही आदेश हैं। उन्होंने कहा कि खदान सीमांकन भी राजस्व कर्मी द्वारा नहीं किया गया है। वहां पत्थर नहीं लगाए गए हैं। इससे बालू ठेकेदार व निर्धारित पट्टा क्षेत्र से आगे बढ़कर भी अवैध खनन कर सकते हैं। मांग की है कि जिले की सभी आठ खदानों के पट्टों में एनओसी जारी करने में एनजीटी और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन कराया जाए।
अवैध खनन से केन नदी को बचाने के लिए आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
बुंदेलखंड की ‘भाग्य रेखा’ कही जाने वाली केन नदी को अवैध खनन से पहुंचाए जा रहे नुकसान के विरुद्ध अब सीमावर्ती मध्य प्रदेश में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। मंगलवार को जनपद की सरहद से जुड़े पन्ना जिला मुख्यालय में मध्य प्रदेश अनुसूचित/जनजाति, पिछड़ा वर्ग युवा संघ के बैनर तले प्रदर्शन हुआ। इसकी अगुवाई संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष और बांदा जिला पंचायत के पूर्व सदस्य लोधी महेंद्र पाल वर्मा ने की। प्रदर्शन के बाद पन्ना कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया। जनसभा भी हुई।
खनिज प्रभारी बोले, नहीं होने देंगे उल्लंघन
लमेहटा खदान में पोकलैंड और जेसीबी के प्रयोग की जानकारी जिला प्रभारी अधिकारी खनिज/अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्ता को नहीं है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी नियम कानून का उल्लंघन नहीं होने देंगे। इस बारे में वह तत्काल कार्रवाई कर रहे हैं। सीमांकन और एनओसी की प्रक्रिया का भी वह पता करवा रहे हैं। अगर इसमें ढिलाई बरती गई होगी तो कार्रवाई की जाएगी।