1990 से 2016 तक अपने प्लाट या मकान अथवा अन्य किसी तरह की रजिस्ट्री कराने वाले लोग ध्यान दें। आप अपने मूल दस्तावेजों को अच्छी तरह से सहेजने के साथ-साथ उसकी फोटो कॉपी भी कराकर सुरक्षित कर लें। दरअसल, कानपुर के रजिस्ट्री दफ्तर में इस समय सीमा दस्तावेजों के रिकार्ड की स्याही मिटने की कगार पर है। ऐसे में दस्तावेज खोने पर रजिस्ट्री दफ्तर से कॉपी निकलवाना मुश्किल होगा।
पहले किसी प्लाट या मकान की रजिस्ट्री कराने पर रजिस्ट्री दफ्तर से मूल दस्तावेज मालिक को सौंपकर उसकी फोटो कापी रिकार्ड में रख ली जाती थी। हर साल औसतन करीब 35 हजार रजिस्ट्रियां होती हैं। इस तरह 26 साल में करीब नौ लाख दस हजार फोटोकॉपी रजिस्ट्री दफ्तर के रिकार्ड रूम में रखी हैं। इनमें से ज्यादातर फोटो कापियाें की स्याही उड़ने लगी है। अधिवक्ता वसीम अख्तर का कहना है कि यह बहुत बड़ी समस्या है। इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालांकि जुलाई 2016 से दस्तावेजों को स्कैन कर कंप्यूटर में सुरक्षित किया जाने लगा था।
जगह की कमी, कैसे सुरक्षित रहे रिकार्ड
रजिस्ट्री दफ्तर के निचले तल पर मुख्य रिकार्ड रूम है। इसमें नवंबर 1865 तक का रिकार्ड रखा है। जोन एक का 1865 से 1994 तक, जोन दो का 1865 से 19 जुलाई 1992 और जोन तीन का 1865 से 1994 तक का रिकार्ड रखा है। तब तक तीन जोन ही हुआ करते थे। बाद में जोन चार बना। इसके बाद के रिकार्ड जोन वार दफ्तरों में रखे गए हैं। हालत यह हैं कि अलमारी ऐसे रखी गई हैं कि दो लोग गैलरी से नहीं निकल सकते हैं। ऐसे में कर्र्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।